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Odisha News: सरकार को 175 करोड़ रुपए का नुकसान, SCERT के पूर्व निदेशक मनोज पाढ़ी गिरफ्तार, कोर्ट ने भेजा जेल

SCERT Odisha: ओडिशा में कक्षा 1 से 8 तक की ओड़िया पाठ्यपुस्तकों में गंभीर त्रुटियां मिलने के मामले में अपराध शाखा ने एससीईआरटी के पूर्व निदेशक मनोज कुमार पाढ़ी को गिरफ्तार किया है। मामले में सरकारी खजाने को करीब 175 करोड़ रुपए के नुकसान का आरोप है।
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भारत

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Rakesh Mishra

Jul 14, 2026

Former SCERT director Manoj Padhi

पूर्व निदेशक मनोज कुमार पाढ़ी। फोटो- आईएएनएस

भुवनेश्वर। ओडिशा अपराध शाखा ने मंगलवार को राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) के पूर्व निदेशक मनोज कुमार पाढ़ी को कक्षा एक से आठ तक की ओड़िया पाठ्यपुस्तकों में पाई गई गंभीर त्रुटियों के सिलसिले में गिरफ्तार कर लिया है। इन त्रुटियों के कारण राज्य सरकार के खजाने को लगभग 175 करोड़ रुपए का नुकसान होने का आरोप है। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के निर्देश पर पाठ्यपुस्तकों की त्रुटियों की जांच ओडिशा पुलिस की अपराध शाखा को सौंपी गई थी।

वहीं दूसरी तरफ पूर्व निदेशक मनोज कुमार पाढ़ी को कटक की जेएमएफसी अदालत में पेश किया गया। अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज करते हुए उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया। अतिरिक्त लोक अभियोजक नित्यानंद पांडा ने बताया कि अदालत के आदेश के बाद मनोज पाढ़ी को जेल भेज दिया गया है। इससे पहले मुख्यमंत्री ने पाठ्यपुस्तकों की तैयारी और प्रकाशन की पूरी प्रक्रिया की आपराधिक जांच के आदेश दिए थे। उन्होंने परिषद के निदेशक को त्रुटियों को लेकर अपराध शाखा के पुलिस अधीक्षक के पास एक अलग प्राथमिकी दर्ज कराने का भी निर्देश दिया था।

दी गईं थी अहम जिम्मेदारियां

जांच में पाया गया कि ओडिशा प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारी पाढ़ी (57) शिक्षक शिक्षा और परिषद के निदेशक के रूप में काम करते हुए राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत पाठ्यपुस्तक विकास प्रक्रिया के समग्र पर्यवेक्षण, समन्वय, निगरानी और अनुमोदन के लिए जिम्मेदार थे। अपराध शाखा के सूत्रों ने आरोप लगाया कि पाढ़ी अपने आधिकारिक कर्तव्यों का निर्वहन करने में पूरी तरह असफल रहे और उन्होंने पाठ्यपुस्तकों की सामग्री का उचित सत्यापन बिना जानबूझकर छपाई के लिए तैयार पांडुलिपियों को मंजूरी दे दी और आगे बढ़ा दिया।

सरकारी खजाने को नुकसान

सूत्रों ने कहा कि उनके इस कृत्य और लापरवाही के कारण त्रुटिपूर्ण पाठ्यपुस्तकों का प्रकाशन और वितरण हुआ, जिससे सरकारी खजाने को लगभग 175 करोड़ रुपए का भारी नुकसान हुआ और इसके साथ ही छात्रों के शैक्षणिक हित भी प्रभावित हुए। पाढ़ी के खिलाफ प्रथम दृष्टया साक्ष्य स्थापित होने के बाद अपराध शाखा ने उन्हें भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत नामजद किया। इससे पहले मुख्यमंत्री ने उन परिस्थितियों और कमियों की जांच के लिए विकास आयुक्त की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया था, जिनके कारण स्कूली पाठ्यपुस्तकों में गलतियां हुईं।

इनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू

समिति की रिपोर्ट पर कार्रवाई करते हुए राज्य सरकार ने परिषद के पूर्व निदेशक मनोज पाढ़ी और तीन सहायक निदेशकों को निलंबित कर दिया तथा छह अन्य सहायक निदेशकों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी। पाढ़ी के साथ सहायक निदेशक प्रलिप्त मिश्रा, दिलीप कुमार साहू और भारती टुडू को निलंबित किया गया है। इसके अलावा सहायक निदेशक बंदिता पटनायक, मानस रंजन राउत, मनोरंजन महापात्र, डॉ. प्रशांत कुमार साहू, मानस कुमार नायक और डॉ. सुदर्शन संतरा के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की गई है।

सरकार ने लिया फैसला

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार पाठ्यपुस्तकों की तैयारी में कमियों को दूर करने और छात्रों के शैक्षणिक हितों की रक्षा के लिए समिति की ओर से की गई सभी 14 सिफारिशों को लागू करेगी। इन सिफारिशों में परिषद की ओर से एक मास्टर अशुद्धि सुधार रजिस्टर तैयार करना, सभी छात्रों तक सही जानकारी पहुंचाना और परिषद के भीतर एक समर्पित गुणवत्ता आश्वासन सेल की स्थापना करना शामिल है। सरकार ने यह भी निर्णय लिया है कि भविष्य में भाषा की शुद्धता, चित्रों, सामग्री की गुणवत्ता और मुद्रण मानकों से संबंधित अनिवार्य मंजूरी के बिना कोई भी पाठ्यपुस्तक छपाई के लिए नहीं भेजी जाएगी।