
Congress: कांग्रेस संसदीय दल की नेता सोनिया गांधी ने गुरुवार को 10, जनपथ पर पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं के साथ अहम बैठक की। इस बैठक को केंद्र सरकार की ओर से हाल विदेशी अंशदान विनियमन कानून (एफसीआरए) के नियमों में बदलाव से जोड़कर देखा जा रहा है। गांधी परिवार की ओर से संचालित ट्रस्टों पर नए नियमों की आंच आते देख सोनिया गांधी ने पुराने वफादारों को बुलाकर चर्चा की है। बैठक में पार्टी में हाशिए पर चल रहे जनार्दन द्विवेदी के अलावा राजस्थान के पूर्व सीएम अशोक गहलोत, पूर्व केंद्रीय मंत्री पवन बंसल व सलमान खुर्शिद तथा महासचिव मुकुल वासनिक शामिल हुए।
जानकार सूत्रों के मुताबिक बैठक का मुख्य एजेंडा राजीव गांधी फाउंडेशन और राजीव गांधी चेरिटेबल ट्रस्ट की संरचना, संचालन व्यवस्था और भविष्य की कार्ययोजना पर मंथन था। बैठक फाउंडेशन और संबद्ध संस्थानों के कामकाज को नए सिरे से व्यवस्थित करने, जिम्मेदारियों के पुनर्वितरण और अनुभवी नेताओं की भूमिका बढ़ाने पर चर्चा हुई। हालांकि कांग्रेस की ओर से इस बैठक को लेकर औपचारिक बयान जारी नहीं किया गया है। ट्रस्टों के सदस्य राहुल गांधी व प्रियंका गांधी दिल्ली से बाहर होने के कारण बैठक में मौजूद नहीं थे। कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि नियमों में बदलाव की चलते ट्रस्टों और संस्थागत ढांचे को भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप तैयार किया जा रहा है।
राजस्थान के पूर्व सीएम गहलोत की बैठक में मौजूदगी ने राजनीतिक हलकों का ध्यान खींचा। गहलोत लंबे समय बाद 10 जनपथ में आयोजित 'क्लोज सर्किल स्ट्रेटैजिक मीटिंग' में शामिल हुए। जनार्दन द्विवेदी और पवन बंसल जैसे नेताओं की मौजूदगी को उनके अनुभव के उपयोग की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है।
मोदी सरकार ने 2020 में राजीव गांधी फाउंडेशन को चीन की सरकार व संगठनों तथा मुस्लिम कट्टरपंथी जाकिर नाइक से चंदे की शिकायत के बाद जांच करवाई थी और संगठन का एफसीआरए लाइसेंस रद्द कर दिया था। नए एफसीआरए नियमों में संगठनों पर विदेशी चंदे व नवीनीकरण के लिए कई जानकारियां देने के नियम लागू किए हैं।
कांग्रेस संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर एफसीआरए नियमों में किए गए नए संशोधनों को तत्काल वापस लेने की मांग की है। उन्होंने कहा कि ये संशोधन नागरिक समाज संगठनों, खासकर अल्पसंख्यक संस्थाओं द्वारा संचालित एनजीओ की स्वायत्तता और नियमित कामकाज को गंभीर रूप से प्रभावित करेंगे। उन्होंने कहा कि मार्च 2026 में लोकसभा में एफसीआरए संशोधन विधेयक लाने की विफल कोशिश के बाद सरकार अब नियमों के जरिए वही प्रावधान लागू करना चाहती है। नए नियमों से सरकार को उन संस्थाओं की संपत्तियां जब्त करने का अधिकार मिल जाएगा, जिनका एफसीआरए लाइसेंस रद्द हो गया हो या उसकी अवधि समाप्त हो गई हो।