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Impact of Late Monsoon: जून का महीना खत्म होने से पहले ही मानसून ने किसानों, नीति निर्माताओं और बाजार की चिंता बढ़ा दी है। देश में 1 से 25 जून तक देश में सामान्य से 41 फीसदी कम बारिश दर्ज हुई है। धान, सोयाबीन, दालों और तिलहन की बुवाई कई राज्यों में पिछड़ रही है, जबकि जलाशयों में अपेक्षित जलभराव नहीं हो पाया है। इसका असर केवल खेतों तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण मांग, खाद्य उत्पादन और महंगाई पर भी पड़ने की आशंका बढ़ गई है। हालांकि अभी उम्मीदें जुलाई की बारिश पर टिकी हैं, जो पूरे खरीफ सीजन और उससे जुड़ी अर्थव्यवस्था की दिशा तय करेगी। यदि जुलाई में अच्छी बारिश नहीं हुई तो इसका असर फसल उत्पादन से लेकर धान, दाल और तिलहन जैसी फसलों के उत्पादन के साथ-साथ ऑटोमोबाइल, एफएमसीजी, ग्रामीण खपत और अन्य उपभोक्ता क्षेत्रों की मांग पर महसूस किया जा सकता है।
आइएमडी के आंकड़ों के अनुसार 25 जून तक देश में औसतन 74.5 मिमी बारिश हुई, जबकि सामान्य स्तर 126.9 मिमी है। यानी मानसून 41 फीसदी पीछे चल रहा है। देश के 77 फीसदी भौगोलिक क्षेत्र में बारिश या तो डिफिशिएंट या लार्ज डिफिशिएंट श्रेणी में है। राजस्थान समेत 9 राज्यों को छोड़कर शेष 23 राज्यों में बारिश में ज्यादा कमी दर्ज की गई है।
| प्रदेश | बारिश की कमी (फीसदी में) |
|---|---|
| गुजरात | 76% |
| छत्तीसगढ़ | 67% |
| झारखंड | 63% |
| महाराष्ट्र | 59% |
| उत्तर प्रदेश | 52% |
| ओडिशा | 49% |
| बिहार | 49% |
| मध्य प्रदेश | 43% |
| केरल | 33% |
जून का महीना खरीफ सीजन की बुवाई का आधार माना जाता है। धान, सोयाबीन, कपास, मक्क, दालें और गन्ने की शुरुआती बुवाई इसी अवधि में होती है। पूर्वी भारत देश के धान उत्पादन का बड़ा केंद्र है। बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और ओडिशा में भारी वर्षा घाटा दर्ज हुआ है। हालांकि जून के शुरुआती दौर में हुई बारिश के कारण धान और दलहन की बुवाई अभी तक प्रभावित नहीं हुई है। धान की बुवाई पिछले वर्ष की तुलना में 4.26 फीसदी और दलहन की 0.83 फीसदी अधिक है। लेकिन लगातार सूखे दिनों के कारण रोपाई और आगे की बुवाई प्रभावित होने का खतरा बढ़ रहा है।
मध्य प्रदेश देश का सबसे बड़ा सोयाबीन उत्पादक राज्य है, जहां 50 फीसदी बारिश की कमी है। महाराष्ट्र और गुजरात में भी स्थिति खराब है। ये तीनों राज्य मिलकर देश के अधिकांश सोयाबीन उत्पादन का आधार हैं। वहीं अरहर, उड़द और मूंग जैसी दालों की खेती भी मानसून पर निर्भर है। महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान, तेलंगाना में बारिश सामान्य से काफी कम है। यदि जुलाई में भी स्थिति नहीं सुधरी तो दाल उत्पादन पर असर पड़ सकता है।
बारिश की कमी का मतलब केवल खेती का संकट नहीं है। जून में कम वर्षा का असर जुलाई-अगस्त में जलाशयों के जलस्तर पर भी दिख सकता है। खासतौर पर मध्य भारत, गंगा बेसिन और पश्चिमी भारत के बांधों में अपेक्षित जलभराव नहीं होने की आशंका है।
Updated on:
26 Jun 2026, 1:24 AM IST
Published on:
26 Jun 2026, 12:56 AM IST
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