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सुखबीर बादल पर हमले को राजनीतिक मुद्दा बनाएगा अकाली दल, लोंगोवाल की विरासत से जोड़ेगा पूरा नैरेटिव

Sukhbir Badal Nanded Attack: पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले शिरोमणि अकाली दल सुखबीर सिंह बादल पर हुए हमले को मध्यमार्गी सिख नेतृत्व पर हमले के नैरेटिव से जोड़ने की तैयारी में है। 20 अगस्त को लोंगोवाल की पुण्यतिथि पर पार्टी संत हरचंद सिंह लोंगोवाल की विरासत और अपनी राजनीतिक पहचान को प्रमुखता से सामने रख सकती है।
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Sukhbir Badal Nanded attack
पंजाब के पूर्व डिप्टी सीएम सुखबीर सिंह बादल पर हुआ हमला (Photo-IANS)

Sukhbir Badal Attack: पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। इससे पहले शिरोमणि अकाली दल अब पार्टी अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल पर हुए हमले को एक बड़े राजनीतिक नैरेटिव से जोड़ने की तैयारी में है। पार्टी का कहना है कि पंजाब में मध्यमार्गी सिख नेतृत्व लगातार निशाने पर रहा है। बताया जा रहा है कि इस मुद्दे को पार्टी 20 अगस्त को संगरूर के लोंगोवाल गांव में होने वाले कार्यक्रम में प्रमुखता से उठाया जा सकता है। इस कार्यक्रम में अकाली दल संत हरचंद सिंह लॉन्गोवाल की 41वीं पुण्यतिथि मनाएगा।

1985 में लोंगोवाल की हुई थी हत्या

संत हरचंद सिंह लोंगोवाल की 1985 में हत्या कर दी गई थी। इससे कुछ ही समय पहले उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के साथ पंजाब समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। यह समझौता पंजाब संकट का समाधान बातचीत और राजनीतिक प्रक्रिया के जरिए निकालने की कोशिश का हिस्सा था।

सुखबीर सिंह बादल पर हुआ हमला

वहीं, 13 अगस्त को नांदेड़ के एक गुरुद्वारे में सुखबीर सिंह बादल पर हमला हुआ, जिसमें वह बाल-बाल बचे। अकाली दल के वरिष्ठ नेता परंबंस सिंह बंटी रोमाना ने इस घटना को मध्यमार्गी सिख नेतृत्व पर हमला बताया है। पार्टी के अन्य नेताओं का भी कहना है कि सुखबीर बादल को निशाना बनाना केवल एक व्यक्ति पर हमला नहीं, बल्कि पंजाब की मध्यमार्गी राजनीतिक आवाज को कमजोर करने की कोशिश है।

लोंगोवाल की विरासत को राजनीतिक आधार बनाने की कोशिश

अकाली दल के इस नैरेटिव में संत हरचंद सिंह लोंगोवाल की भूमिका अहम है। पंजाब के उथल-पुथल भरे 1980 के दशक में लोंगोवाल अकाली दल के प्रमुख नेताओं में शामिल थे। केंद्र के साथ बातचीत और पंजाब समझौते पर हस्ताक्षर करने के उनके फैसले ने उन्हें उस राजनीतिक धड़े में मजबूती से स्थापित किया, जो बातचीत के जरिए समाधान का पक्षधर था।

मध्यमार्गी सिख राजनीति का खुद को वारिस बताने की कोशिश

दरअसल, चुनाव से पहले शिरोमणि अकाली दल लोंगोवाल की विरासत को केवल श्रद्धांजलि तक सीमित रखने के बजाय उसे अपनी राजनीतिक पहचान से जोड़ना चाहता है। पार्टी खुद को संवैधानिक राजनीति, बातचीत और मध्यमार्गी सिख नेतृत्व की उस परंपरा का उत्तराधिकारी बताने की कोशिश कर सकती है, जिसका प्रतिनिधित्व लॉन्गोवाल करते थे।

सुखबीर बादल पर हुआ हमला इस पुराने राजनीतिक संदर्भ में एक नया अध्याय जोड़ता है। अकाली दल का मानना है कि राजनीतिक मतभेदों को हिंसा में बदलने की अनुमति नहीं दी जा सकती और पंजाब अपनी मध्यमार्गी राजनीतिक आवाजों को खोने का जोखिम नहीं उठा सकता।

Updated on:
19 Aug 2026 04:05 pm
Published on:
19 Aug 2026 04:04 pm