
केरल हाईकोर्ट। फोटो सोर्स-IANS
Kerala High Court Waqf Board: केरल हाईकोर्ट ने बुधवार को राज्य सरकार को केरल स्टेट वक्फ बोर्ड में मौजूदा तीन रिक्तियों को भरने के लिए छह सप्ताह का समय दिया। हालांकि, कोर्ट ने संशोधित वक्फ कानून के तहत बोर्ड के मौजूदा गठन को लेकर चल रही व्यापक कानूनी चुनौती पर फिलहाल कोई फैसला नहीं दिया।
मुख्य न्यायाधीश सौमेन सेन और न्यायमूर्ति वी.एम. श्याम कुमार की डिवीजन बेंच ने एडवोकेट जनरल के. जाजू बाबू के उस बयान को दर्ज किया, जिसमें उन्होंने बताया कि सरकार ने संशोधित कानून के अनुसार रिक्तियों को भरने के लिए पहले ही कदम उठाना शुरू कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि फिलहाल उसकी चिंता वक्फ बोर्ड के उचित तरीके से काम करने को लेकर है, जहां तीन रिक्तियां लंबित हैं। इसी वजह से मामले की सुनवाई छह सप्ताह के लिए टाल दी गई, ताकि सरकार आवश्यक कदम उठा सके।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस चरण में वह इस सवाल पर फैसला नहीं कर रहा है कि संशोधित वक्फ कानून के प्रावधानों का कथित रूप से पालन नहीं करने के कारण मौजूदा वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन जरूरी है या नहीं। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि उसके अंतरिम आदेश ने मौजूदा बोर्ड को काम करने से नहीं रोका है।
केरल वक्फ बोर्ड के गठन को लेकर कई जनहित याचिकाएं (PIL) दाखिल की गई हैं। इनमें खास तौर पर संशोधित वक्फ कानून के तहत गैर-मुस्लिम सदस्यों और कानून में निर्धारित समुदायों के प्रतिनिधियों को शामिल नहीं किए जाने का आरोप लगाया गया है।
इन्हीं याचिकाओं में से एक ईसाई चैरिटेबल संगठन Assembly of Christian Trust Services (ACTS) ने दाखिल की है। इस याचिका में बोर्ड के गठन के साथ-साथ विवादित मुन्नंबम भूमि का विवरण केंद्र के UMEED पोर्टल पर अपलोड करने की कार्रवाई को भी चुनौती दी गई है।
ACTS ने दावा किया है कि इस कदम का इलाके में रहने वाले हिंदू और ईसाई परिवारों पर प्रभाव पड़ता है। संगठन ने बोर्ड के भूमि का विवरण अपलोड करने के अधिकार पर भी सवाल उठाया है। याचिका में दलील दी गई है कि वक्फ कानून के तहत यह जानकारी दाखिल करने का अधिकार मुतवल्ली के पास है। ACTS ने शिया, बोहरा और आगा खान समुदायों के प्रतिनिधियों को शामिल नहीं किए जाने समेत अन्य आधारों पर भी आपत्ति जताई है। संगठन ने कानून के अनुसार सदस्यों को नामित करने के लिए सरकार की ओर से नई अधिसूचना जारी करने की मांग की है।
एक अन्य जनहित याचिका में भाजपा नेता शोन जॉर्ज ने दो गैर-मुस्लिम सदस्यों की तत्काल नियुक्ति की मांग की है। उन्होंने यह घोषणा करने की भी मांग की है कि संशोधित वक्फ कानून की धारा 14(1) का पालन नहीं होने के कारण बोर्ड कानून के विपरीत काम कर रहा है।
याचिकाओं में CPI(M) के नेता और पूर्व विधायक कुन्हम्मद कुट्टी मास्टर को वक्फ बोर्ड में शामिल किए जाने को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। पिछली सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने मौखिक रूप से कहा था कि राज्य सरकार को बोर्ड के पुनर्गठन से रोकने वाला कोई आदेश नहीं है। कोर्ट ने यह भी कहा था कि सरकार बोर्ड के कामकाज को सुनिश्चित करने के लिए कानून के तहत अनिवार्य गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति कर सकती है।
हालांकि, बुधवार के आदेश में हाईकोर्ट ने इन चुनौतियों के गुण-दोष पर कोई फैसला नहीं किया। बेंच ने कहा कि बोर्ड के गठन से जुड़े कानूनी प्रावधानों के कथित उल्लंघन की इस चरण में जांच करना जरूरी नहीं है। अब सरकार के पास रिक्तियों को भरने और आगे की दिशा तय करने के लिए छह सप्ताह का समय है। अगली सुनवाई में सरकार को रिक्तियों को भरने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी देनी होगी। इस बीच वक्फ बोर्ड के मौजूदा गठन को लेकर कानूनी चुनौती जारी रहेगी।
Updated on:
19 Aug 2026 05:28 pm
Published on:
19 Aug 2026 05:28 pm
बड़ी खबरें
View Allराष्ट्रीय
ट्रेंडिंग
