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Recall: पुणे में जब दिनदहाड़े पूर्व आर्मी चीफ की कर दी गई थी हत्या, तीन गोलियां मार भाग गए थे हत्यारे

ऑपरेशन ब्लू स्टार के बाद 1986 में पुणे में जनरल एएस वैद्य को दिनदहाड़े गोलियों से भून दिया गया। नांदेड में सुखबीर बादल पर हमले के बाद चर्चा में 40 साल पुरानी घटना...पढ़ें पूरा मामला
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Aug 13, 2026
Attack On Sukhbir Singh Badal
तस्वीर में सुखबीर सिंह बादल, पूर्व पीएम इंदिरा गांधी और पूर्व आर्मी चीफ एएस वैद। (फोटो- ANI/Wikipedia)

महाराष्ट्र के नांदेड में 13 अगस्त को निहंग सिखों ने पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल पर कृपाण से हमला बोल दिया। इस घटना के बाद 40 साल पहले महाराष्ट्र के ही पुणे में हुई एक घटना याद आ गई। 1986 में अगस्त महीने में ही 10 तारीख को हमलावरों ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल एएस वैद्य को दिनदहाड़े गोलियों से भून दिया था। यह हत्या भी नफरती हिंसा का ही नतीजा थी। खालिस्तान समर्थक सिख ऑपरेशन ब्लू स्टार को लेकर जनरल वैद्य से नाराज थे।

लगातार धमकी देते रहे थे सिख आतंकी

वैद्य सेना में 31 साल रहे। उन्हें सेना प्रमुख बनाने के एक साल बाद इंदिरा गांधी ने पंजाब के स्वर्ण मंदिर में चलाए गए ऑपरेशन ब्लू स्टार का नेतृत्व करने के लिए कहा था। इस वजह से वह अनेक सिखों के जानी दुश्मन बन गए थे। साउथ ब्लॉक में सेना प्रमुख के दफ्तर में लगभग रोज सिख आतंकियों के ऐसे खत आते थे जिनमें उन्हें जान से मार डालने की धमकी होती थी।

जनरल वैद्य कहते- किसी गोली पर मेरा नाम लिखा होगा तो वह आकर ही रहेगी, इसमें डरना क्या

जनरल वैद्य के स्टाफ उन्हें जब आतंकियों की धमकी को लेकर सतर्क करते थे तो उनका जवाब यही होता था कि दो युद्ध लड़ लेने के बाद मैं खतरों से भाग नहीं सकता। अगर किसी गोली पर मेरा नाम लिखा होगा तो वह मुझ तक आ ही जाएगी।

10 अगस्त, 1986 को वह गोली आ ही गई। उनके पसंदीदा शहर पुणे में। उसी शहर में जहां वह सेना से रिटायर होने के बाद सुकून की ज़िंदगी बिताना चाहते थे। दिन के 11.45 बज रहे थे। जनरल की कार के पास एक नई सुजुकी मोटरसाइकल आई। उस पर सवार शख्स ने ड्राइविंग सीट की तरफ से जनरल वैद्य के सिर को गोलियों से छलनी कर दिया। पहली ही गोली उनकी खोपड़ी में लगी, दूसरी भी वहीं धंसी और तीसरी कंधे में लगी। पल भर में उनके प्राण पखेरू उड़ गए। पत्नी भानुमती भी साथ ही थीं। उनका भी कंधा जख्मी हो गया था। जख्मी हालत में ही वह पति की लाश गोद में लिए रहीं।

कैसे हुई थी हत्या

जनरल वैद्य कोरेगांव पार्क के अपने खूबसूरत बंगले से करीब दस बजे एक कार्यक्रम में जाने के लिए निकले। उनकी कार पुणे के राजेंद्रसिंहजी मार्ग पर टी पॉइंट पर टर्न ले रही थी। कार की रफ्तार जैसे ही कम हुई, ड्राइवर की खिड़की की तरफ से आई गोली पूर्व आर्मी चीफ के सिर में लगी। पहली ही गोली उनकी खोपड़ी छेद गई और संभवतः जान भी ले गई। पर हमलावरों ने दो और गोलियां दागीं।

जनरल का एक गनमैन भी कार में पीछे की सीट पर था। श्रीमती वैद्य और गनमैन रामचंद्र जब तक कुछ समझ पाते, तब तक सब कुछ खत्म हो चुका था। 1965 और 1971 की लड़ाइयों में दुश्मन के टैंक का सामना कर चुका फौजी नफरती हत्यारों की गोलियों से ढेर पड़ा था। उन्हें ढेर करने वाले चारों हमलावर भाग चुके थे। अगले दिन अमृतसर में खलिस्तान कमांडो फोर्स की ओर से जारी एक नोट में हत्या की जिम्मेदारी ली गई थी और ऑपरेशन ब्लू स्टार में शामिल तीन अन्य जनरल को भी मार डालने की धमकी दी गई थी।

जनरल वैद्य को इंदिरा ने बनाया था सेना प्रमुख, विवादित रहा था फैसला

वैद्य को ऑपरेशन ब्लू स्टार (जून 1984) से करीब एक साल पहले (जुलाई 1983) सेना प्रमुख बनाया गया था। तब वह जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ (GOC-in-C) थे। इससे नाराज होकर लेफ्टिनेंट जनरल एसके सिन्हा ने इस्तीफा दे दिया था। सिन्हा वाइस चीफ ऑफ द आर्मी स्टाफ थे और अपने से जूनियर को सेना प्रमुख बनाए जाने से नाराज हो गए थे।

वैद्य को सेना प्रमुख बनाने का तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का फैसला बड़ा विवादों में रहा था। यहां तक कि 2016 में जब कांग्रेस ने लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन रावत को सेना प्रमुख बनाए जाने को सही नहीं बताया था, तब भी पंजाब कांग्रेस प्रमुख अमरिंदर सिंह ने इंदिरा के 'उस फैसले को गलत' कहा था।

2016 में जनरल रावत को दो सीनियर अफसरों को नजरअंदाज कर सेना प्रमुख बनाया गया था। अमरिंदर ने इसे गलत बताते हुए इंदिरा सरकार द्वारा जनरल वैद्य की नियुक्ति को भी गलत बताया था।

Updated on:
14 Aug 2026 06:42 pm
Published on:
13 Aug 2026 04:23 pm
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