
पंजाब के पूर्व डिप्टी सीएम सुखबीर सिंह बादल पर हुआ हमला (Photo-IANS)
Sukhbir Badal Attack: पंजाब के पूर्व डिप्टी सीएम और शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल पर गुरुवार को नांदेड में जानलेवा हमला हुआ है। हमलावर ने उन पर धारदार हथियार से हमला किया है, जिससे उनके हाथ में चोट आई हैं। इसके बाद उन्हें एक अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वहीं इस हमले में उनकी सुरक्षा में तैनात एक पुलिसकर्मी भी घायल हुआ है।
बता दें कि सुखबीर सिंह बादल का एक फैसला आज भी चर्चाओं में है, जब उन्होंने एक विवादित अफसर को डीजीपी बना दिया था। हालांकि, अब यही फैसला पार्टी के लिए एक बड़ी रणनीतिक भूल के तौर पर देखा जा रहा है।
दरअसल, साल 2012 में बीजेपी और SAD गठबंधन की सरकार बनने के बाद सुखबीर बादल की सहमति से सुमेध सिंह सैनी को पंजाब का डीजीपी बना दिया गया। यह नियुक्ति उस समय चर्चा का विषय बनी जब सैनी को राज्य का सबसे युवा डीजीपी माना गया।
सुमेध सिंह सैनी 1980 और 1990 के दशक में पंजाब में आतंकवाद के खिलाफ अभियान के दौरान प्रमुख भूमिका निभाने वाले अधिकारियों में से एक थे। हालांकि, उनके करियर पर मानव अधिकार उल्लंघन के आरोप भी लगे। बालवंत सिंह मुल्तानी के गायब होने और अन्य मामलों में उनके खिलाफ आरोप लगे। जिनमें फर्जी एनकाउंटर, अवैध हिरासत और लापता होने जैसी घटनाएं शामिल थीं। कई परिवारों और मानवाधिकार संगठनों ने आरोप लगाया कि उस दौर में पुलिस द्वारा सैकड़ों युवाओं को फर्जी मुठभेड़ों में मारा गया या गायब कर दिया गया।
बताया जाता है कि सुमेध सैनी के कार्यकाल के दौरान हुए बरगाड़ी बेअदबी कांड और बहिबल कलां पुलिस फायरिंग ने 2017 के विधानसभा चुनाव में अकाली दल की हार की जमीन तैयार करने में अहम भूमिका निभाई। पंजाब के पुनर्गठन के बाद पहली बार शिरोमणि अकाली दल तीसरे स्थान पर खिसक गया और उसे पहली बार चुनावी राजनीति में उतरी आम आदमी पार्टी (AAP) से भी पीछे रहना पड़ा।
2007 से 2012 के अकाली दल शासन के दौरान सुमेध सिंह सैनी विजिलेंस ब्यूरो के चीफ डायरेक्टर थे। इसी दौरान राज्य सरकार ने उन्हें कानूनी कार्रवाई से बचाने के लिए कई कदम उठाए। सीबीआई ने 1991 में बलवंत सिंह मुल्तानी और 2008 में बलबीर सिंह भुल्लर के अपहरण और कथित तौर पर गायब किए जाने के मामलों में सैनी के खिलाफ मामला दर्ज किया था।
बरगाड़ी में 12 अक्टूबर 2015 को गुरु ग्रंथ साहिब के पवित्र स्वरूप के फटे हुए पन्ने सड़कों पर मिलने के बाद बेअदबी का मामला शुरुआती दो दिनों तक मुख्य रूप से फरीदकोट जिले तक सीमित रहा। लेकिन 14 अक्टूबर को बहिबल कलां में प्रदर्शन कर रहे सिखों पर पुलिस फायरिंग में दो लोगों की मौत के बाद मामला पूरे पंजाब में फैल गया। उस समय राज्य की पुलिस की कमान सैनी के हाथों में थी।
अब बहिबल कलां गोलीकांड की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने आरोप लगाया है कि पुलिस फायरिंग की साजिश सैनी और तत्कालीन IG पी.एस. उमरानंगल ने रची थी। उमरानंगल भी पुलिस अत्याचारों के आरोपों के कारण विवादों में रहे हैं और अकाली दल-बीजेपी सरकार के दौरान उन्हें महत्वपूर्ण पद मिले थे।
Updated on:
13 Aug 2026 03:59 pm
Published on:
13 Aug 2026 03:59 pm
