राष्ट्रीय

‘नियर स्पेस’ से देश पर नज़र रखेगा ‘सुपर प्रेशर बैलून’

Super Pressure Balloon: 'नियर स्पेस' से देश पर नज़र रखने के लिए विजयवाड़ा का स्टार्टअप रेड बैलून एयरोस्पेस जल्द ही 'सुपर प्रेशर बैलून' लॉन्च करने की तैयारी में है।

2 min read
Apr 25, 2026
Super pressure balloon

अंतरिक्ष की ऊंचाइयों और विमानों की उड़ान के बीच एक ऐसा क्षेत्र है जिसे 'नियर स्पेस' कहा जाता है। इस क्षेत्र में न तो सामान्य विमान उड़ सकते हैं और न ही सैटेलाइट टिक सकते हैं। अब आंधप्रदेश के विजयवाड़ा का स्टार्टअप रेड बैलून एयरोस्पेस (Red Balloon Aerospace) अगले कुछ महीनों में भारत (India) का पहला स्वदेशी 'सुपर प्रेशर बैलून' - एसपीबी (Super Pressure Balloon - SPB) लॉन्च करने के साथ इस 'नियर स्पेस' को भरने की तैयारी में है।

ये भी पढ़ें

ब्रह्मांड का अब तक का सबसे बड़ा 3D नक्शा तैयार, 5 साल बाद मिली बड़ी सफलता

क्या है 'सुपर प्रेशर बैलून' तकनीक?

साधारण मौसमी गुब्बारे ऊंचाई पर जाकर फूलते हैं और अंततः फट जाते हैं, लेकिन यह स्वदेशी गुब्बारा अपना आकार और दबाव बनाए रखता है, जिससे यह हफ्तों या महीनों तक हवा में रह सकता है। इस मिशन में 25 से 75 सेमी रेजोल्यूशन वाले उच्च-क्षमता वाले कैमरे और सेंसर लगे होंगे। सैटेलाइट के विपरीत इन प्लेटफॉर्म्स को वापस ज़मीन पर उतारकर रिपेयर, अपग्रेड और दोबारा लॉन्च किया जा सकता है।

क्या है 'नियर स्पेस'?

'नियर स्पेस' धरती से 20 किलोमीटर से 100 किलोमीटर (कर्मन रेखा) के बीच का हिस्सा है। यहाँ हवा इतनी पतली होती है कि विमान के पंख काम नहीं करते और इतनी घनी है कि उपग्रह वहाँ घर्षण के कारण जल जाएंगे। इसीलिए गुब्बारे ही इस क्षेत्र में काम करने का एकमात्र ज़रिया हैं।

सैटेलाइट से अच्छा और सस्ता

सैटेलाइट लॉन्च में करोड़ों डॉलर और सालों का समय लगता है। सुपर प्रेशर बैलून सैटेलाइट की तुलना में बहुत कम खर्च में तैयार हो जाते हैं। इन्हें हफ्तों के भीतर तैनात किया जा सकता है। उन दुर्गम गांवों और आदिवासी क्षेत्रों में इंटरनेट और मोबाइल कनेक्टिविटी पहुंचा सकते हैं जहाँ मोबाइल टावर लगाना असंभव है।

देश पर रखेगा नज़र, आपदा प्रबंधन में 'गेम चेंजर'

सुपर प्रेशर बैलून नियर स्पेस से देश पर नज़र रखेगा। इससे सैकड़ों किलोमीटर लंबी पाइपलाइन, पावर ग्रिड और समुद्री सीमाओं की रियल-टाइम मॉनिटरिंग की जा सकती है। बाढ़ या चक्रवात में 'बर्ड्स-आई व्यू' प्रदान कर सकता है, जिससे राहत कार्यों में मदद मिलेगी।

ये भी पढ़ें

ब्लैक होल सिर्फ निगलता ही नहीं बल्कि बाहर भी फेंकता है, रिसर्च से हुआ खुलासा
Published on:
25 Apr 2026 01:31 pm
Also Read
View All