
Black hole
अक्सर ऐसा माना जाता है कि अंतरिक्ष में ब्लैक होल अपने आसपास की हर चीज़ों को निगल जाता है, लेकिन सच इससे थोड़ी अलग है। वैज्ञानिकों के मुताबिक हर ब्लैक होल ऐसा नहीं करता है। कई बार ऐसा होता है कि ब्लैक होल कुछ मैटर (गैस, धूल और तारे का पदार्थ, जिसे ब्लैक होल अपनी ओर खींचता है) को पूरी तरह निगल नहीं पाता और वही मैटर बहुत तेज़ रफ्तार से जेट (धाराओं) के रूप में बाहर निकलता है। वैज्ञानिकों की टीम ने पहली बार किसी ब्लैक होल से निकलने वाले जेट की तत्कालिक शक्ति, यानी उसी समय की असली ताकत को मापा है। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों की टीम ने वैश्विक दूरबीन नेटवर्क से मिली 18 वर्षों की उच्च-रिजॉल्यूशन रेडियो इमेजिंग के आधार पर रिसर्च करके ये निष्कर्ष निकाले हैं।
ब्लैक होल में सब कुछ सीधे अंदर नहीं गिरता, बल्कि पहले उसके चारों तरफ घूमने लगता है। यह इतना तेज़ घूमता है कि बहुत ज्यादा गर्म हो जाता है। गर्मी की वजह से वहाँ बहुत शक्तिशाली मैग्नेटिक फील्ड बन जाती है और कुछ गर्म प्लाज़्मा को पकड़ लेती है। वही फंसे हुए मैटर को ब्लैक होल के ऊपर और नीचे की दिशा में बहुत तेज़ी से बाहर फेंक दिया जाता है। यही बाहर निकलती हुई पतली, तेज धाराएं जेट कहलाती हैं।
ये जेट हर ब्लैक होल में नहीं बनते। इसके लिए दो खास शर्तें जरूरी होती हैं। पहली, ब्लैक होल बहुत तेज़ी से घूम रहा हो। दूसरी, वह आसपास के मैटर को तेज़ी से खींचकर निगल रहा हो। जब ये दोनों स्थितियाँ बनते हैं, तब ब्लैक होल के ध्रुवों (ऊपर-नीचे के हिस्सों) से शक्तिशाली जेट निकलते हैं।
रिसर्च के अनुसार इस जेट की ताकत लगभग 10,000 सूर्यों के बराबर है। यह इतनी ऊर्जा छोड़ता है जितनी हज़ारों सूरज मिलकर देते हैं। इसकी रफ्तार भी चौंकाने वाली है, जो करीब 540 मिलियन किलोमीटर प्रति घंटा है। यह प्रकाश की गति का लगभग आधा है।
Published on:
18 Apr 2026 08:25 am
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