
Quantum age will make bank transactions unsafe
दुनियाभर के टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट्स और गीक्स इन दिनों गूगल की एक ऐसी चेतावनी पर बहस कर रहे हैं, जिसने डिजिटल जगत में खलबली मचा दी है। गूगल ने अपनी ताज़ा रिपोर्ट में क्वांटम कंप्यूटर के युग की समयसीमा को घटाकर 2029 कर दिया है। इसका सीधा मतलब है कि अब से 3 साल बाद दुनिया का मौजूदा डिजिटल सुरक्षा कवच ताश के पत्तों की तरह ढह सकता है।
अब तक माना जा रहा था कि शक्तिशाली क्वांटम कंप्यूटर अगले दशक के मध्य (2035 के आसपास) तक आएंगे। लेकिन गूगल के वैज्ञानिकों ने 'क्वांटम इन्फ्लेक्शन पॉइंट' को 2029 पर लाकर खड़ा कर दिया है। गूगल ने अपने ब्लॉग में स्पष्ट कहा है कि 2029 तक ये मशीनें इतनी ताकतवर हो जाएंगी कि मिनटों में खेल कर सकेगी और वर्तमान 'क्रिप्टोग्राफिक स्टैंडर्ड्स' और 'डिजिटल सिग्नेचर' को तोड़ सकेंगी।
वर्तमान में बिटकॉइन और अन्य क्रिप्टोकरेंसी 'एलिप्टिक कर्व क्रिप्टोग्राफी' पर टिकी हैं। यह एक ऐसी गणितीय पहेली है, जिसे सुलझाने में आज के सबसे तेज़ सुपरकंप्यूटरों को भी करोड़ों साल लग जाएंगे। गूगल के व्हाइट पेपर के अनुसार 2029 के क्वांटम कंप्यूटर इस जटिल कोड को चंद घंटों या मिनटों में क्रैक कर देंगे। इस तरह जिस 'प्राइवेट की' के दम पर आपका डिजिटल वॉलेट सुरक्षित है, वो अर्थहीन हो जाएगी। बिटकॉइन जैसी संपत्तियां अपनी वैल्यू खो सकती हैं क्योंकि उनकी सुरक्षा का आधार ही खत्म हो जाएगा।
यह खतरा सिर्फ क्रिप्टो तक सीमित नहीं है। क्वांटम कंप्यूटरों का हमला हमारे दैनिक डिजिटल जीवन की हर उस कड़ी पर होगा जो 'एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन' पर चलती है। इसके बाद बैंकों के ट्रांजैक्शन और ऑनलाइन पेमेंट सिस्टम असुरक्षित हो जाएंगे। वॉट्सऐप जैसे चैटिंग ऐप्स, ईमेल और फाइल ट्रांसफर का एन्क्रिप्शन टूट जाएगा। देशों की गोपनीय सुरक्षा जानकारी और डेटाबेस हैकर्स की पहुंच में होंगे।
आज के कंप्यूटर और स्मार्टफोन 'लीनियर' (रैखिक) तरीके से काम करते हैं। इसके विपरीत, क्वांटम कंप्यूटर एक साथ लाखों संभावनाओं पर प्रक्रिया कर सकते हैं। जो गणितीय समस्या आज के कंप्यूटरों के लिए नामुमकिन है, उसे क्वांटम कंप्यूटर पलक झपकते हल कर लेते हैं।
गूगल ने आगह किया है कि दुनिया को सुरक्षित रखने के लिए अब 'पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी' (पीक्यूसी) की ओर तुरंत बढ़ना होगा। कंपनियों को 2029 से पहले अपने सुरक्षा मानकों को बदलना होगा, नहीं तो डिजिटल दुनिया में 'प्राइवेसी' शब्द इतिहास की बात बनकर रह जाएगा। फिलहाल ये मशीनें प्रायोगिक दौर में हैं, लेकिन 2029 का 'टिपिंग पॉइंट' अब ज्यादा दूर नहीं है।
Updated on:
02 Apr 2026 09:04 am
Published on:
02 Apr 2026 09:00 am
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