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135 साल पुरानी सेंट्रल सेक्रेटेरिएट लाइब्रेरी के नए ठिकाने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र से मांगा लेआउट प्लान और एफिडेविट

सुप्रीम कोर्ट ने नई दिल्ली में मौजूद 135 साल पुरानी सेंट्रल सेक्रेटेरिएट लाइब्रेरी को दूसरी जगह ले जाने के प्रस्ताव पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। कोर्ट ने केंद्र को निर्देश दिया है कि वह तीन हफ़्ते के अंदर एक हलफ़नामा दाखिल करे, जिसमें प्रस्तावित नई जगह के एरिया और असल लेआउट प्लान की जानकारी हो।
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Supreme Court
सुप्रीम कोर्ट (File Photo)

Central Secretariat Library: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सेंट्रल विस्टा रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट के तहत शास्त्री भवन से 135 साल पुरानी ऐतिहासिक सेंट्रल सेक्रेटेरिएट लाइब्रेरी (CSL) को दूसरी जगह ले जाने के बारे में विस्तृत जानकारी मांगी। कोर्ट ने केंद्र को निर्देश दिया कि वह लाइब्रेरी के लिए प्रस्तावित जगह के बारे में विस्तृत हलफनामा दाखिल करे और कोर्ट के सामने असल लेआउट प्लान पेश करे। कोर्ट ने केंद्र को यह हलफनामा दाखिल करने के लिए तीन हफ्ते का समय दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई 16 नवंबर को होनी है।

सुप्रीम कोर्ट ने लिया था संज्ञान

यह मामला जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस संजीव सचदेवा की बेंच के सामने सुनवाई के लिए आया। सुप्रीम कोर्ट ने मिडिया रिपोर्ट पर स्वतः संज्ञान लिया था, जिसमें बताया गया था कि शास्त्री भवन को गिराए जाने के आदेश के बाद लाइब्रेरी के 8.5 लाख से अधिक दुर्लभ किताबों, ऐतिहासिक दस्तावेजों और गजेटियर के सुरक्षित स्थानांतरण और संरक्षण को लेकर गंभीर संकट पैदा हो गया है।

क्या है विवाद

विवाद तब शुरू हुआ जब आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय (MoHUA) के तहत सेंट्रल पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट (CPWD) ने 17 सितंबर को एक आदेश जारी किया। इस आदेश में सेंट्रल सेक्रेटेरिएट लाइब्रेरी (CSL) सहित शास्त्री भवन से सभी मंत्रालयों और कार्यालयों को 30 सितंबर तक जगह खाली करने का निर्देश दिया गया था। इसमें तोड़-फोड़ और पुनर्निर्माण के काम को आसान बनाने के लिए सभी फर्नीचर और उपकरणों को हटाने का भी निर्देश दिया गया था।

इसके बाद सामने आया कि डायरेक्टरेट ऑफ एस्टेट्स ने पूरी लाइब्रेरी को रखने के लिए कर्तव्य भवन-2 में केवल दो कमरे (लगभग 300 वर्ग मीटर) आवंटित करने का प्रस्ताव दिया था। इस पर आपत्ति जताते हुए केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने फरवरी में MoHUA को पत्र लिखा था। पत्र में स्पष्ट किया गया था कि प्रस्तावित 300 वर्ग मीटर की जगह 8.5 लाख किताबों, शोध सुविधाओं और विशाल संग्रह को रखने के लिए बहुत कम थी, जिससे लाइब्रेरी को इतनी सीमित जगह में पूरी तरह से स्थानांतरित करना असंभव था।

1891 में हुई थी लाइब्रेरी की शुरुआत

सेंट्रल सेक्रेटेरिएट लाइब्रेरी कोलकाता में नेशनल लाइब्रेरी के बाद देश की दूसरी सबसे बड़ी सरकारी लाइब्रेरी है। इसकी स्थापना 1891 में कलकत्ता में इंपीरियल सेक्रेटेरिएट लाइब्रेरी के रूप में हुई थी। 1911 में राजधानी को दिल्ली ले जाने के बाद इसे शुरू में सिविल लाइन्स के पुराने सचिवालय में रखा गया था और बाद में 1930 के दशक में इसे नॉर्थ ब्लॉक में ले जाया गया। 1969 से यह शास्त्री भवन में स्थित है, जो चार मंजिलों और लगभग 5,500 वर्ग मीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है। इस लाइब्रेरी को सिविल सेवा की तैयारी करने वालों, शोधकर्ताओं और सरकारी अधिकारियों के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ केंद्र माना जाता है।

Updated on:
05 Oct 2026 11:33 am
Published on:
05 Oct 2026 11:26 am