राष्ट्रीय

कक्षा 9 में तीसरी भाषा का बोझ बच्चों के लिए तनावपूर्ण, CBSE की पॉलिसी पर सुप्रीम कोर्ट सख्‍त, दी अहम सलाह

देश की सर्वोच्च अदालत ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) द्वारा कक्षा 9 में तीन भाषाओं को अनिवार्य रूप से पढ़ाने के फैसले पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। कोर्ट ने कहा कि यह काफी तनावपूर्ण है और ऐसा करने से छात्रों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ेगा।
2 min read
• •
Updated: 16 Jul 2026, 2:18 PM IST
Subhas Chandra Bose controversy Supreme Court hearing.
सुप्रीम कोर्ट (Photo- ANI)

नई दिल्ली। देश की सर्वोच्च अदालत ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) द्वारा कक्षा 9 में तीन भाषाओं को अनिवार्य रूप से पढ़ाने के फैसले पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। कोर्ट ने कहा कि यह काफी तनावपूर्ण है और ऐसा करने से छात्रों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ेगा। कोर्ट ने केंद्र सरकार ने सीबीएसई की इस पॉलिसी को लागू न करने की सलाह दी है। जस्टिस बी.वी. नागरत्ना की पीठ ने यह टिप्पणी मद्रास उच्च न्यायालय के उस आदेश के खिलाफ तमिलनाडु सरकार की अपील पर सुनवाई के दौरान की, जिसमें राज्य के प्रत्येक जिले में जवाहर नवोदय विद्यालय स्थापित करने का निर्देश दिया गया था।

कक्षा 9 में नई भाषा का औचित्य क्या?

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना ने अपने छात्र जीवन और व्यक्तिगत अनुभवों का हवाला देते हुए सीबीएसई के इस फैसले पर असहमति जताई। उन्होंने कहा कि "नहीं, यह बहुत गलत है। नौवीं कक्षा वैसे ही तनावपूर्ण होती है। इस पड़ाव पर नई भाषा क्यों पढ़ाई जानी चाहिए? इसे छठी कक्षा से ही शुरू किया जाना चाहिए। जब हम स्कूल में थे, तब नौवीं कक्षा के अंत में हमें भाषा चुनने की स्वतंत्रता होती थी।" कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि आठवीं कक्षा के अंत से ही बच्चों पर बोर्ड परीक्षा का दबाव शुरू हो जाता है। ऐसे में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा कक्षा 9 से तीन भाषाओं का अध्ययन अनिवार्य करना छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य के विपरीत है, भले ही बोर्ड 10वीं में इसके लिए परीक्षा न लेने की बात कह रहा हो।

'इसे भाषा का मुद्दा न बनाएं'

कोर्ट में तमिलनाडु सरकार की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील पी. विल्सन ने तर्क दिया कि केंद्र को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत तीन-भाषा फार्मूले के बजाय राज्य की नीति के अनुरूप दो-भाषा फार्मूले को अपनाना चाहिए। जैसे ही केंद्र के वकील ने जवाब देना शुरू किया, पीठ ने दोनों पक्षों से आग्रह किया कि वे मामले को भाषा का मुद्दा बनाने से बचें।

क्या है मुख्य विवाद?

दरअसल, यह पूरा मामला मद्रास उच्च न्यायालय के उस फैसले से जुड़ा है जिसमें अदालत ने तमिलनाडु सरकार को निर्देश दिया था कि वह राज्य के हर जिले में जवाहर नवोदय विद्यालय खोलने की अनुमति दे। उच्च न्यायालय का मानना था कि इसके लिए अनुमति न देना बच्चों को उनकी पसंद की शिक्षा से वंचित करना है। हालांकि, तमिलनाडु सरकार ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, जिसके बाद शीर्ष अदालत ने इस पर रोक लगा दी थी। अदालत ने अब केंद्र और राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वे आपसी समन्वय से इस गतिरोध का हल निकालें और भूमि की पहचान करें, न कि इसे भाषाई मोर्चे की जंग में तब्दील होने दें।

Updated on:
16 Jul 2026, 2:18 PM IST
Published on:
Also Read
View All
दिल्ली पुलिस मुख्यालय पर प्रदर्शन का बड़ा असर, ACP मनस्वी वशिष्ठ निलंबित; वकील-पुलिस विवाद ने लिया नया मोड़

दिल्ली में सांस लेना भी हुआ मुश्किल! कई इलाकों में AQI 400 पार पहुंचा, जहरीली हवा के बीच GRAP-2 की पाबंदियां लागू

Indian Air Force Land Dispute: दिल्ली में वायुसेना की 40 एकड़ जमीन पर खींचतान, रिटायरमेंट से पहले पूर्व एयर चीफ ने राजनाथ सिंह को लिखी चिट्ठी

‘ऐसी हिंसा बर्दाश्त नहीं, दोषियों को सबक सिखाओ’, त्रिपुरा में BSF जवानों पर हमले से भड़के CM माणिक साहा

भारत से व्यापार बंद होने पर पाकिस्तान को हुआ 40 बिलियन डॉलर का नुकसान, PIBC ने फिर से ट्रेड शुरू करने की लगाई गुहार