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‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ पर JPC से नहीं होगी CJI की मुलाकात, सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया मामला

supreme court: सुप्रीम कोर्ट ने साफ़ किया है कि 'एक देश, एक चुनाव' पर जॉइंट पार्लियामेंट्री कमिटी (JPC) के साथ कोई बैठक नहीं हो रही है।
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Oct 01, 2026
Supreme Court
सुप्रीम कोर्ट (File Photo)

Supreme Court On JPC Meeting: एक देश एक चुनाव को लेकर होने वाली जॉइंट पार्लियामेंट्री कमिटी (JPC) की बैठक पर सुप्रीम कोर्ट ने अहम बयान दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है CJI या अन्य जजों के साथ 'एक देश, एक चुनाव' के मामले पर कोई बैठक नहीं हो रही है।

6 अक्टूबर का दौरा टला

एक देश, एक चुनाव से जुड़े प्रस्तावों की जांच कर रही संसद की संयुक्त समिति (JPC) की 6 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट के जजों के साथ होने वाली बैंठक टल गई है। समिति के अध्यक्ष सांसद पीपी चौधरी ने कहा कि सदस्यों की तारीखें आपस में मेल नहीं खा रही थीं और उनके पास कुछ दूसरे काम भी हैं। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने भी स्पष्ट किया है कि इस दौरान CJI और जजों के साथ कोई बैठक नहीं हो रही है।

पहले क्या था कार्यक्रम?

इससे पहले सीनियर एडवोकेट और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने दावा किया था कि JPC, भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) और सुप्रीम कोर्ट के अन्य जजों से मुलाकात करने वाली है। JPC एक साथ चुनाव कराने से जुड़े दो प्रस्तावों की जांच कर रही है। इनमें संविधान (129वां संशोधन) बिल, 2024 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) बिल, 2024 शामिल हैं। इन प्रस्तावों का मकसद देश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने की व्यवस्था से जुड़े बदलाव करना है। सिब्बल ने इस प्रस्तावित बातचीत पर गंभीर सवाल उठाए थे।

कपिल सिब्बल का तर्क क्या है?

कपिल सिब्बल कहना था कि उन्होंने कभी भी ऐसी संसदीय समिति के बारे में नहीं सुना, जो किसी प्रस्तावित कानून पर सुप्रीम कोर्ट के जजों के साथ बातचीत करे। संसद का काम कानून बनाना है और न्यायपालिका का काम उस कानून की संवैधानिकता की समीक्षा करना है। यदि भविष्य में इस कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जाती है, तो वही जज इसकी सुनवाई करेंगे। ऐसे में बिल तैयार करने वाली समिति का सिटिंग जजों से चर्चा करना भारतीय इतिहास में अभूतपूर्व और अनुचित है।

विपक्ष ने भी जताई थी चिंता

विपक्ष ने भी इस बैठक पर आपत्ति जताई थी। समिति के एक सदस्य ने कथित तौर पर पीपी चौधरी को पत्र लिखकर दौरा रद्द करने की मांग की थी। इसमें कहा गया था कि प्रस्तावित कानून की संवैधानिक वैधता या उसके प्रावधानों पर CJI और मौजूदा जजों से बातचीत से दोनों संस्थाओं की स्वतंत्रता को लेकर चिंता पैदा हो सकती है।

Updated on:
01 Oct 2026 08:53 pm
Published on:
01 Oct 2026 08:15 pm