
SIR Row in West Bengal: पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में SIR के काम में लगे न्यायिक अधिकारियों से बदसलूकी और डराने-धमकाने के मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने इस तरह की घटना को न्याय व्यवस्था में बाधा डालने की कोशिश बताते हुए पश्चिम बंगाल सरकार को कड़ी फटकार लगाई है।
सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, तीन महिलाओं समेत सात न्यायिक अधिकारियों को घंटो बिना सुरक्षा, भोजन और पानी को छोड़ दिया गया, जो बेहद चिंताजनक है। पहले से सूचना के बावजूद राज्य सरकार समय पर कार्रवाई नहीं कर सकी, जो प्रशासन की बड़ी विफलता को दर्शाता है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में बेहद सख्त कदम उठाते हुए पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव, गृह सचिव और पुलिस महानिदेशक समेत कई सीनियर अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने राज्य सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि समय रहते उचित सुरक्षा इंतजाम क्यों नहीं किए गए। इस स्थिति में न्यायिक अधिकारियों को क्यों छोड़ा गया। कोर्ट ने स्पष्ट तौर पर कहा कि इस तरह की घटना कानून के शासन पर सीधा हमला है। इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त केंद्रीय बलों की तैनाती सुनिश्चित करने के लिए चुनाव आयोग को निर्देश दिया। कोर्ट ने यह भी कहा कि न्यायिक अधिकारियों और उनके परिवारों को किसी तरह का खतरा है या नहीं, इसका तुरंत आकलन किया जाए और सुरक्षा मुहैया कराई जाए।
कोर्ट ने कहा कि SIR प्रक्रिया में किसी तरह की बाधा नहीं आनी चाहिए। इस दौरान कोर्ट सभी स्थान पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था और आम लोगों की आवाजाही सीमित करने के भी निर्देश दिए। कोर्ट ने सभी संबंधित अधिकारियों को अगली सुनवाई में वर्चुअल रूप से पेश होने और पूरी रिपोर्ट देने का आदेश दिया।
पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट से नाम हटाने को लेकर लोगों की तरफ से आरोप लगाए गए हैं। इसको लेकर राज्य में जगह-जगह विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं। पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में अधिकारियों के घेराव का मामला भी इसी से जुड़ा हुआ मामला है।