
Supreme Court Notice to Centrer: विरोध-प्रदर्शनों के दौरान भीड़ को नियंत्रित करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली पेलेट गन (Pellet Guns) एक बार फिर देश की सबसे बड़ी अदालत के कटघरे में है। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान पेलेट गन के शिकार हुए दो पीड़ितों और इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के पूर्व स्पेशल डायरेक्टर यशोवर्धन आजाद द्वारा दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
अदालत ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए बेहद महत्वपूर्ण टिप्पणी की और सरकार से पेलेट गन के इस्तेमाल से जुड़े मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) पर स्पष्टीकरण मांगा है। हालांकि, कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से पूरे देश में पेलेट गन पर पूर्ण प्रतिबंध (Ban) लगाने वाली अपनी मांग में संशोधन करने को भी कहा है।
यह मामला जंतर-मंतर पर हुए एक प्रदर्शन से जुड़ा है, जहां सुरक्षा बलों द्वारा चलाई गई पेलेट गन के छर्रों से कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे। याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत के सामने प्रमुख रूप से तीन मांगें रखी गई हैं:
मानक प्रक्रिया (SOP) की समीक्षा: भीड़ नियंत्रण के लिए घातक और अमानवीय हथियारों के इस्तेमाल पर सख्त नियम बनें।
मुआवजा: पेलेट गन का शिकार होकर अपनी आंखें और सेहत गंवाने वाले पीड़ितों को उचित आर्थिक मुआवजा मिले।
मुफ्त इलाज: गंभीर रूप से घायलों को सरकार की ओर से बेहतर और मुफ्त चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने माना कि नागरिक अधिकारों की सुरक्षा और जनसुरक्षा के बीच संतुलन बनाना बेहद जरूरी है। अदालत ने केंद्र को नोटिस जारी कर पेलेट गन के मौजूदा SOP पर जवाब मांगा है, ताकि यह तय किया जा सके कि गैर-घातक कहे जाने वाले इन हथियारों का इस्तेमाल किस परिस्थिति में और कैसे किया जाए।
साथ ही, पीठ ने याचिकाकर्ताओं को सलाह दी कि वे पेलेट गन पर पूरी तरह से बैन लगाने की मांग में थोड़ा संशोधन करें, क्योंकि कानून-व्यवस्था की अत्यंत गंभीर परिस्थितियों में सुरक्षा बलों के पास भीड़ को नियंत्रित करने के विकल्प होने भी जरूरी हैं।
पेलेट गन का विवाद नया नहीं है। भारत में इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से 2010 के बाद जम्मू-कश्मीर में हिंसक भीड़ को तितर-बितर करने के लिए कम घातक (Less-Lethal) हथियार के रूप में शुरू किया गया था। लेकिन समय के साथ इसके गंभीर और जानलेवा परिणाम सामने आए: