राष्ट्रीय

बागी TMC विधायकों की सदस्यता पर सुप्रीम कोर्ट ने दखल से किया इनकार, स्पीकर पर जताया भरोसा

सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के 10 TMC विधायकों की अयोग्यता याचिका पर स्पीकर को उचित समय में फैसला लेने की उम्मीद जताते हुए हस्तक्षेप से इनकार कर दिया।
2 min read
• •
Sep 28, 2026
Supreme Court
सुप्रीम कोर्ट (File Photo)

Supreme Court TMC MLAs Disqualification: पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के 10 बागी विधायकों की विधानसभा सदस्यता खत्मन करने की मांग पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने इस मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है। याचिका में पश्चिम बंगाल विधानसभा के स्पीकर को जुलाई में दाखिल अयोग्यता याचिकाओं पर जल्द फैसला लेने का निर्देश देने की मांग की गई थी।

सुप्रीम कोर्ट में इस मामले में सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने सुनवाई की, जिसमें जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना शामिल थे। पीठ ने कहा कि उसे इस बात पर संदेह करने का कोई कारण नहीं है कि स्पीकर उचित समय-सीमा के भीतर मामले पर फैसला करेंगे।

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि 10 विधायकों के खिलाफ अयोग्यता याचिकाएं 8 जुलाई 2026 को दाखिल किए जाने की बात कही गई है। सुप्रीम कोर्ट के पिछले फैसलों के मुताबिक, स्पीकर से अपेक्षा की जाती है कि संवैधानिक शक्ति का इस्तेमाल करते हुए अयोग्यता याचिका पर फैसला उचित समय में, सामान्यतः तीन महीने के भीतर किया जाए।

कोर्ट को भी आईना देखना चाहिए'

सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने स्पीकर के लिए न्यायालय द्वारा निश्चित समय-सीमा तय करने पर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि अदालतों को भी पहले अपने कामकाज पर नजर डालनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि कई कानूनों में न्यायपालिका के लिए भी मामलों को निर्धारित समय में निपटाने का प्रावधान है, लेकिन अदालतें स्वयं कई बार उन समय-सीमाओं का पालन नहीं कर पातीं। ऐसे में स्पीकर को समय-सीमा में फैसला करने का निर्देश देने से पहले अदालतों को आईना देखना चाहिए।

CJI सूर्यकांत ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि स्पीकर अयोग्यता याचिकाओं पर फैसला करते समय सुप्रीम कोर्ट के पिछले फैसलों में निर्धारित समय-सीमा का पालन करेंगे।

कपिल सिब्बल ने कहा- करीब तीन महीने से लंबित है मामला

याचिकाकर्ता और TMC विधायक सोभनदेब चट्टोपाध्याय की ओर से कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल पेश हुए। उन्होंने दलील देते हुए कहा कि अयोग्यता संबंधी आवेदन करीब तीन महीने से स्पीकर के समक्ष लंबित हैं।

सिब्बल ने कहा कि 8 अक्टूबर को तीन महीने पूरे हो जाएंगे और यह मामला उस कथित पैटर्न का हिस्सा है, जिसमें पहले अयोग्यता की कार्यवाही लंबित रहती है और बाद में चुनाव आयोग के समक्ष राजनीतिक दल से जुड़े विवाद पहुंच जाते हैं।

उन्होंने अदालत से मामले में नोटिस जारी करने और संबंधित पक्षों का जवाब सुनने का आग्रह किया।

'देरी से राजनीतिक अस्थिरता पैदा हो सकती है'

कपिल सिब्बल ने दलील दी कि चुनाव से जुड़े संवेदनशील मामलों में फैसला लेने में देरी एक पैटर्न बन गई है और यदि न्यायालय हस्तक्षेप नहीं करता है तो इससे राजनीतिक स्थिति जटिल हो सकती है।

उन्होंने महाराष्ट्र के शिवसेना विवाद से जुड़े सुभाष देसाई मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि स्पीकर के समक्ष अयोग्यता की कार्यवाही और चुनाव आयोग के समक्ष पार्टी से जुड़े विवादों के बीच समन्वय जरूरी है।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट इस मामले में हस्तक्षेप करने के लिए तैयार नहीं हुआ और याचिका खारिज कर दी।

किन 10 विधायकों के खिलाफ है अयोग्यता की मांग?

याचिका में इन 10 विधायकों को अयोग्य घोषित करने की मांग की गई है, जो ऋतब्रत बनर्जी, फिरहाद हकीम, अरूप रॉय, संदीपन साहा, अखरुज्जमां अंसारी, शिउली साहा, सबीना यास्मिन, बिप्लब मित्रा, जावेद खान और रथिन घोष है। याचिका के मुताबिक, इन विधायकों ने TMC के टिकट पर चुनाव जीता था, लेकिन बाद में पार्टी के भीतर बने एक प्रतिद्वंद्वी गुट के साथ चले गए।

Updated on:
28 Sept 2026 01:39 pm
Published on:
28 Sept 2026 01:11 pm
Also Read
View All
ECI के विवाद पर BJP नेता ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले की दिलाई याद, राहुल गांधी को दी जनता के बीच काम करने की नसीहत

लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी हिंसा पर प्रदीप भंडारी का राहुल-केजरीवाल पर हमला, बोले- हर दो मिनट में वीडियो बनाने वाले अब मौन क्यों?

CJP के जेल भरो आंदोलन पर भड़कीं शिवसेना प्रवक्ता शायना एनसी, बोलीं- सरकार और जनता सब देख रही है

Bihar MLC Election: अनुज सिंह विवाद पर प्रशांत किशोर की दो टूक, बोले- संगीन केस वाले को टिकट का सवाल ही नहीं, सबूत है तो सामने लाइए

समुद्र में एक तरफ झुक गया था 9,000 टन पाम ऑयल से भरा विदेशी टैंकर,भारतीय कोस्ट गार्ड ने बचाया, अब साहस की हर जगह चर्चा