
Supreme Court Form 6 SIR Election Commission: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चल रहे विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को फॉर्म- 6 को लेकर अहम टिप्पणी की है। सीजेआई सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग की ओर से मतदाता पंजीकरण के लिए इस्तेमाल किए जा रहे संशोधित Form 6 को सुप्रीम कोर्ट ने मंजूरी नहीं दी है।
सुनवाई के दौरान सीजेआई ने कहा कि किसी भी संशोधित Form 6 को हमने मंजूरी नहीं दी है। यह स्पष्ट है। जब रिकॉर्ड पेश किया जाएगा तो हम देखना चाहेंगे कि इसे किसने संशोधित किया।
बता दें कि CJI की यह टिप्पणी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछले सप्ताह चुनाव आयोग ने दावा किया था कि SIR के दौरान कुछ राज्यों में ऑनलाइन Form 6 के साथ जो नया घोषणा-पत्र जोड़ा गया है, उसे सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी प्राप्त है।
फॉर्म-6 का इस्तेमाल नए मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में शामिल कराने के लिए किया जाता है। नए प्रावधान के तहत आवेदन करने वाले व्यक्ति को यह बताना होता है कि वह या उसके माता-पिता पिछले SIR में मैप किए गए थे या नहीं।
पहले इस्तेमाल किए गए Form 6 में इस तरह की जानकारी मांगने वाला प्रावधान नहीं था। इस बदलाव को लेकर चुनाव आयोग के भीतर भी आपत्तियां सामने आई थीं। दो चुनाव आयुक्तों ने कथित तौर पर कहा था कि मतदाताओं के पंजीकरण नियम, 1960 में संशोधन किए बिना Form 6 में इस तरह का बदलाव नहीं किया जा सकता।
दरअसल, फॉर्म- 6 में बदलाव उस समय विवाद का विषय बना जब चुनाव आयोग की ओर से 26 सितंबर को जारी एक बयान में बिहार SIR से जुड़े मई 2026 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला दिया गया।
हालांकि, उपलब्ध अदालती रिकॉर्ड और रिपोर्टों के अनुसार, बिहार SIR मामले में सुप्रीम कोर्ट के सामने नया Form 6 घोषणा-पत्र विचार के लिए आया ही नहीं था। यह घोषणा-पत्र उस फैसले के बाद लागू किया गया था।
यह मामला मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के कामकाज को चुनौती देने वाली याचिका की सुनवाई के दौरान सामने आया। CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल थे।
अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी की ओर से दाखिल याचिका में चुनाव आयोग के कथित तौर पर एकतरफा लिए गए 14 फैसलों को रद्द करने की मांग की गई है। याचिका में एक सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट जज की अध्यक्षता में स्वतंत्र न्यायिक जांच आयोग या विशेष जांच दल (SIT) गठित करने की मांग भी की गई है। इसमें साइबर सुरक्षा और आईटी विशेषज्ञों को भी जांच टीम में शामिल करने की मांग की गई है।
याचिकाकर्ता ने जनप्रतिनिधित्व कानून, 1950 की धारा 32 के तहत CEC ज्ञानेश कुमार, वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त मनीष गर्ग, IT महानिदेशक सीमा खन्ना और कथित रूप से जिम्मेदार अन्य अधिकारियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कर अभियोजन शुरू करने के निर्देश देने की भी मांग की है।