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स्टेट बार काउंसिलों को सुप्रीम कोर्ट की फटकार, कहा- अब मेंस क्लब नहीं चलेगा, 2 महिला सदस्य अनिवार्य

Supreme Court on Bar Council Women Members: सुप्रीम कोर्ट ने स्टेट बार काउंसिलों को मेंस क्लब बताते हुए हर राज्य बार काउंसिल में दो महिला सदस्यों को सह-नामित करने का निर्देश दिया।
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Supreme Court facial recognition.
सुप्रीम कोर्ट (फोटो-ANI)

Supreme Court on State Bar Council: देश भर की स्टेट बार काउंसिल के कामकाज, चुनावी प्रक्रियाओं और महिलाओं के प्रतिनिधित्व को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ये संस्थाएं काफी हद तक 'मेंस क्लब' बन गई हैं और इस एकाधिकार को पूरी तरह खत्म किया जाना चाहिए। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने स्टेट बार काउंसिल के चुनावों और महिला सदस्यों को शामिल करने से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह अहम फैसला सुनाया।

पुरुषों का एकाधिकार खत्म करेंगे- CJI

सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्य कांत ने बार काउंसिल के मौजूदा ढांचे पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कानूनी पेशे में महिलाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन बार काउंसिल में लीडरशिप की भूमिकाओं में उनकी भागीदारी न के बराबर है। CJI सूर्य कांत ने कहा कि कुछ लोग बार काउंसिल को अपनी जागीर समझते हैं, जिसे पूरी तरह खत्म किया जाना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि बार काउंसिल के कामकाज में निष्पक्षता, आज़ादी और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए महिलाओं की सीधी भागीदारी जरूरी है।

हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस दो महिला सदस्यों को नॉमिनेट करेंगे

बार काउंसिल में जेंडर डाइवर्सिटी को बढ़ावा देने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि हर राज्य बार काउंसिल में दो महिला सदस्यों को नॉमिनेट किया जाए। यह ज़िम्मेदारी संबंधित हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस को सौंपी गई है। नॉमिनेट की जाने वाली दो महिलाओं में से एक का उस हाई कोर्ट की पूर्व महिला जज और दूसरी एक सीनियर महिला वकील होनी चाहिए।

इसके अलावा, कोर्ट ने साफ किया कि अगर किसी महिला वकील ने पहले बार काउंसिल का चुनाव लड़ा है और हार गई हैं, तो उन्हें नॉमिनेशन के लिए अयोग्य नहीं माना जाएगा। नॉमिनेशन करते समय चीफ जस्टिस को राज्य की खास परिस्थितियों और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व का भी ध्यान रखना होगा।

वोट ट्रांसफर की प्रक्रिया कमेटी को सौंपी गई

कई लोगों ने बार काउंसिल चुनावों में सिंगल ट्रांसफरेबल वोट सिस्टम और महिला उम्मीदवारों के पक्ष में वोट ट्रांसफर की प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को नए सिरे से विचार करने के लिए जस्टिस (रिटायर्ड) सुधांशु धूलिया की अध्यक्षता वाली एक हाई-पावर्ड सुपरवाइजरी कमेटी को सौंप दिया है। कोर्ट ने इच्छुक बार सदस्यों और वकीलों को कमेटी के सामने अपने सुझाव और विचार रखने के लिए एक हफ्ते का समय दिया है। मौखिक सुनवाई के बाद कमेटी एक नई व्यवस्था का प्रस्ताव देगी।

नॉमिनेशन प्रक्रिया में तेजी लाने का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने सभी हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस से नॉमिनेशन की प्रक्रिया में तेजी लाने को कहा है। कोर्ट ने कहा कि बार काउंसिल और उनकी एग्जीक्यूटिव कमेटियों के गठन की प्रक्रिया बिना किसी अनावश्यक देरी के औपचारिक रूप से पूरी की जानी चाहिए।

Updated on:
04 Aug 2026 04:29 pm
Published on:
04 Aug 2026 04:26 pm