
Shankersinh Vaghela (Photo-IANS)
Shankersinh Vaghela News : अहमदाबाद। कांग्रेस छोड़ने के करीब एक दशक बाद गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री शंकरसिंह वाघेला की पार्टी में वापसी की चर्चाएं तेज हो गई हैं। वाघेला की कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से पार्टी में लौटने को लेकर उच्च स्तरीय बातचीत चल रही है।
शंकरसिंह वाघेला वाघेला इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए कहा कि भाजपा सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए मैं (कांग्रेस में) शामिल होने के लिए तैयार हूं। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर उनकी अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के गुजरात प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला, गुजरात कांग्रेस अध्यक्ष अमित चावड़ा और पूर्व केंद्रीय मंत्री भरतसिंह सोलंकी से बातचीत हो चुकी है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी वापसी की औपचारिक घोषणा लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष (एलओपी) राहुल गांधी से मुलाकात के बाद ही होगी। यह राजनीतिक घटनाक्रम अगले महीने होने वाले गांधीनगर नगर निगम चुनावों और अगले साल दिसंबर में प्रस्तावित विधानसभा चुनावों से ठीक पहले सामने आया है।
वर्ष 2017 में कांग्रेस छोड़ने वाले 86 वर्षीय नेता वाघेला ने कहा कि उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व से साफ कह दिया है कि उन्हें पार्टी से किसी पद या चीज की उम्मीद नहीं है, वे केवल अपना योगदान देना चाहते हैं। 2027 के चुनाव को अपनी राजनीतिक पारी का अंतिम अवसर मानते हुए वाघेला ने 2020 में गठित अपनी 'प्रजा शक्ति डेमोक्रेटिक पार्टी' (पीएसडीपी) को फिर से सक्रिय करने के लिए 2 अक्टूबर से एक आक्रामक अभियान शुरू करने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि यह विधानसभा चुनाव मेरा आखिरी मौका है। मुझे नहीं लगता कि इसके बाद मैं इतना सक्रिय रह सकूंगा। मैं भाजपा से लड़ने में अपना योगदान देना चाहता हूं।
वाघेला ने यह भी बताया कि करीब छह महीने पहले उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और तत्कालीन गुजरात प्रभारी मुकुल वासनिक से संपर्क किया था, लेकिन तब कोई जवाब नहीं मिला था। इस महीने की शुरुआत में वासनिक की जगह सुरजेवाला ने गुजरात का प्रभार संभाला है।
वाघेला की वापसी को लेकर कांग्रेस नेताओं की राय बंटी हुई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमित चावड़ा ने मीडिया से कहा कि पार्टी ने 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी हैं और कई असंतुष्ट नेता आने वाले दिनों में कांग्रेस के साथ मंच साझा करेंगे तथा गुजरात में बदलाव लाने के लिए मिलकर काम करेंगे। गुजरात कांग्रेस के प्रवक्ता मनीष दोषी ने कहा कि लोग राहुल गांधी में देश और संविधान को बचाने वाले नेता के रूप में उम्मीद देख रहे हैं। इसलिए, कांग्रेस समान विचारधारा वाले सभी लोगों का स्वागत कर रही है।
हालांकि, पार्टी नेतृत्व का एक वर्ग वाघेला की 2017 में हुई विदाई की परिस्थितियों को देखते हुए अभी भी सतर्क है। वाघेला ने 2017 में अपने 77वें जन्मदिन पर राज्यसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस छोड़ने का ऐलान किया था। उस चुनाव में सोनिया गांधी के तत्कालीन राजनीतिक सलाहकार दिवंगत अहमद पटेल बेहद कम अंतर से चुनाव जीत पाए थे। उस समय गुजरात विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे वाघेला ने राष्ट्रपति चुनाव में पार्टी के कम से कम आठ विधायकों द्वारा क्रॉस वोटिंग की आशंकाओं के बीच इस्तीफा दे दिया था।
2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 1995 में भाजपा के सत्ता में आने के बाद से अपना सबसे मजबूत प्रदर्शन किया था और हार्दिक पटेल के पाटीदार आरक्षण आंदोलन के साए में 182 में से 77 सीटें जीती थीं। हालांकि, इसके बाद से राज्य में कांग्रेस की स्थिति में भारी गिरावट आई है। वर्तमान में 182 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस के केवल 12 विधायक हैं, जो नेता प्रतिपक्ष पद का दावा करने के लिए भी पर्याप्त नहीं हैं। 2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस को गुजरात में एक भी सीट नहीं मिली थी, जबकि 2024 में उसने एक सीट (बनासकांठा - सांसद गेनीबेन ठाकोर) जीती है।
वर्ष 2021 में अहमद पटेल के निधन के एक साल बाद, स्थानीय निकाय चुनावों से पहले वाघेला ने कांग्रेस में लौटने की इच्छा जताई थी। उनके करीबियों के मुताबिक, वाघेला को उम्मीद थी कि पटेल के निधन के बाद कांग्रेस उन्हें एक 'मार्गदर्शक और रणनीतिकार' के रूप में देखेगी, लेकिन तब ऐसा नहीं हो सका।
अब, वाघेला के कांग्रेस छोड़ते समय गुजरात प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रहे भरतसिंह सोलंकी उनकी वापसी के लिए सक्रिय हैं। सोलंकी ने बताया, "मैं डेढ़ साल से उन्हें वापस लाने की कोशिश कर रहा हूं। अंतिम फैसला पार्टी आलाकमान पर है, लेकिन हमारा लक्ष्य अपने सभी संसाधनों का इस्तेमाल कर गुजरात में भाजपा को हराना है।"
वाघेला का कांग्रेस से जुड़ाव 1990 के दशक से है। 1996 में भाजपा से अलग होने के बाद उन्होंने राष्ट्रीय जनता पार्टी (आरजेपी) का गठन किया था और कांग्रेस के समर्थन से मुख्यमंत्री बने थे। वाघेला इस गठबंधन का श्रेय सार्वजनिक रूप से अहमद पटेल को देते रहे हैं। बाद में आरजेपी का कांग्रेस में विलय हो गया था।
2002 के गोधरा दंगों के बाद हुए विधानसभा चुनावों से पहले वाघेला को गुजरात कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया था। इसके बाद उन्होंने मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली पहली यूपीए सरकार में केंद्रीय मंत्री के रूप में कार्य किया। 2017 में कांग्रेस छोड़ने के बाद उन्होंने 'जनविकल्प पार्टी' बनाई। 2019 में वे राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) में शामिल हुए और 2020 में उन्होंने पीएसडीपी का गठन किया।
Updated on:
30 Sept 2026 12:00 pm
Published on:
30 Sept 2026 12:00 pm
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.
