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SIR पर ECI का स्पष्टीकरण, 20 राज्यों में प्रक्रिया पूरी, इन राज्यों में Declaration Form की जरूरत नहीं

Election Commission of India: SIR को लेकर जारी विवाद के बीच ECI ने Declaration Form पर स्थिति स्पष्ट की है। आयोग के अनुसार, SIR पूरा हो चुके और अभी SIR शुरू नहीं हुए राज्यों/UTs में इस फॉर्म की जरूरत नहीं होगी।
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CEC Gyanesh Kumar: ज्ञानेश कुमार के फैसलों को चुनौती, SC में अगले हफ्ते सुनवाई (फोटो सोर्स: ANI)

Election Commission: SIR को लेकर चुनाव आयोग ने बड़ा स्पष्टीकरण दिया। ECI के एक अधिकारी ने कहा कि जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR पूरा हो चुका है या जहां अभी इसकी शुरुआत नहीं हुई है, वहां Declaration Form की कोई जरूरत नहीं होगी। इसके साथ ही चुनाव आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि SIR की प्रक्रिया के दौरान या सामान्य दिनों में Form 6 (नया वोटर कार्ड बनवाने का फॉर्म) के प्रारूप में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

क्या था Declaration Form और क्यों मांगा जा रहा था?

चुनाव आयोग के अनुसार, Declaration Form एक अतिरिक्त दस्तावेज था। इसे सिर्फ उन्हीं राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मांगा गया था, जहां 24 जून 2025 के आदेश के तहत विशेष गहन पुनरीक्षण चलाया जा रहा था। इस फॉर्म में नए आवेदकों से यह पूछा जाता था कि क्या उनका, उनके माता-पिता या दादा-दादी का नाम पुरानी वोटर लिस्ट में था या नहीं, ताकि पहचान पक्की की जा सकें। बिहार और पश्चिम बंगाल समेत देश के 20 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में SIR की यह प्रक्रिया पहले ही पूरी की जा चुकी है। आयोग ने यह भी बताया कि इस अतिरिक्त फॉर्म के इस्तेमाल को सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा था।

चुनाव आयोग के फैसलों पर उठे सवाल और आयोग का जवाब

हाल ही में मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि पिछले 10 महीनों में चुनाव आयुक्तों के बीच कई फैसलों को लेकर आपत्तियां दर्ज की गई थीं, जिसके बाद मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) विपक्षी दलों के निशाने पर आ गए थे। इन खबरों पर विराम लगाते हुए ECI ने प्रेस नोट जारी कर कहा कि आयोग के सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं। आयोग के अनुसार, 12 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 27 अक्टूबर 2025 और शेष 19 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 14 मई 2026 को SIR का शेड्यूल पूरे आयोग की एकराय मंजूरी से ही जारी किया गया था।

INDIA ब्लॉक का हमला, 'बैलेट जनता का है'

दूसरी तरफ राजधानी दिल्ली में आयोजित 'INDIA' ब्लॉक की बैठक में इस मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला गया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने लोकतंत्र में 'एक व्यक्ति, एक वोट, एक मूल्य' के सिद्धांत पर खतरे का आरोप लगाते हुए पूरी SIR प्रक्रिया को तुरंत वापस लेने की मांग की। खड़गे ने कहा कि देश भर के नागरिक और राजनीतिक दल चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने आयोग से मतदाता सूची में पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही तय करने की मांग करते हुए कहा कि 'बैलेट पर अंतिम अधिकार जनता का है।'