राष्ट्रीय

लिव-इन रिलेशनशिप में पैदा हुआ बच्चा ‘नाजायज नहीं’, उसके अधिकार सुरक्षित हैं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने एक महिला की याचिका पर सुनवाई करते हुए लिव-इन रिलेशनशिप (Live-in Relationship) पर अहम टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा- ऐसे मामलों में आपसी सहमति से बने संबंधों और यौन अपराधों (Sexual offenses) के बीच स्पष्ट अंतर समझना बेहद जरूरी है।

2 min read
Apr 28, 2026
Supreme Court on Live-in Relationship
Supreme Court on Live-in Relationship (AI Image)

सुप्रीम कोर्ट ने एक महिला की याचिका पर सुनवाई करते हुए लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर अहम टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि ऐसे रिश्ते से बाहर निकलना अपने आप में कोई अपराध नहीं माना जा सकता। ऐसे मामलों में आपसी सहमति से बने संबंधों और यौन अपराधों के बीच स्पष्ट अंतर समझना बेहद जरूरी है। याचिका में महिला ने एक व्यक्ति पर शादी का झूठा वादा करके रेप और मारपीट का आरोप लगाया था।

लिव-इन रिलेशनशिप पर कोर्ट की अहम टिप्पणी

महिला ने एक व्यक्ति पर शादी का झूठा वादा करके रेप और मारपीट का आरोप लगाते हुए न्याय की मांग की थी। महिला की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट में न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्ना की बेंच ने कहा- जब दो बालिग, बिना विवाह के साथ रहने का फैसला करते हैं तो ऐसे रिश्तों में कुछ जोखिम भी स्वाभाविक रूप से जुड़े होते हैं। जस्टिस नागरत्ना ने सवाल उठाया कि रिश्ता आपसी सहमति से शुरू हुआ था तो उसे बाद में आपराधिक मामले में कैसे बदला जा सकता है? हालांकि, कोर्ट ने यह भी माना कि ऐसे सवालों को अक्सर पीड़ित को शर्मिंदा करने के तौर पर देखा जाता है, लेकिन सहमति की प्रकृति को समझना जरूरी है।

लिव-इन में पैदा हुए बच्चे 'नाजायज नहीं'

मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा- कई बार लिव-इन रिश्ते लंबे समय तक चलते हैं, लेकिन टूटने के बाद विवाद खड़े हो जाते हैं। महिला के वकील ने दलील दी कि आरोपी ने पीड़ित विधवा महिला से शादी का वादा किया और बच्चा भी पैदा किया। आरोपी पहले से शादीशुदा था, लेकिन उसने पीड़िता से यह बात छुपाई।
कोर्ट ने पूछा- महिला ने शादी किए बिना ही उसके साथ रहने और बच्चा पैदा करने का फैसला क्यों किया? हालांकि, कोर्ट ने महिला के प्रति सहानुभूति जताते हुए कहा कि वह बच्चे के लिए गुजारा-भत्ता मांग सकती है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि लिव-इन के दौरान पैदा हुए बच्चों को नाजायज नहीं माना जा सकता है और उनके अधिकार सुरक्षित हैं। कोर्ट ने दोनों पक्षों को बातचीत से विवाद सुलझाने की सलाह दी है।

Updated on:
28 Apr 2026 05:42 am
Published on:
28 Apr 2026 05:18 am
Also Read
View All
ओमान तट के पास हमले में भारतीय नाविकों की मौत: अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के बयान पर कांग्रेस नेता मनीष तिवारी बोले- उन्हें कोई अफसोस नहीं

अस्पताल में भर्ती होने का किया दावा, TMC सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय मिले BJP मंत्री के घर, महुआ मोइत्रा ने अपने ही सांसद पर लगाए गंभीर आरोप

क्या संसद में अलग बैठ सकता है काकोली घोष के नेतृत्व में TMC के बागी सांसद? नियमों का हवाला देते हुए अभिषेक मनु सिंघवी ने क्या कहा

‘अगर ममता बनर्जी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करना सही, तो पीएम नरेंद्र मोदी और अमित शाह के खिलाफ क्यों नहीं?’ – कीर्ति आज़ाद

G7 की मीटिंग और ट्रंप के साथ बैठक, PM मोदी की फ्रांस यात्रा में किन मुद्दों पर होगी चर्चा?