किसान की शिकायत पर महाराष्ट्र सरकार की ओर से दलील दी गई थी कि सरकारी प्रस्तावों के तहत केवल जंगली हाथियों और बाइसन द्वारा फलों के पेड़ों को हुए नुकसान पर ही मुआवजा दिया जाता है। कृषि अधिकारियों के पंचनामे में भी नुकसान की पुष्टि हुई थी, लेकिन सरकार ने तोतों को शामिल करने से इनकार कर दिया। जस्टिस उर्मिला जोशी-फाल्के और जस्टिस निवेदिता मेहता की बेंच ने सरकार की इस दलील को पूरी तरह खारिज कर दिया।