
फाइल फोटो - IANS
Blood Supply India: वर्ष 2024-25 में देश में लगभग 1.46 करोड़ यूनिट रक्त एकत्र किया गया, जो राष्ट्रीय आवश्यकता के बराबर है। पहली नजर में यह आंकड़ा राहत देने वाला लगता है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और है। पर्याप्त रक्त होने के बावजूद, जहां जरूरत है वहां सही ब्लड ग्रुप का खून, सही समय पर नहीं पहुंचता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसे ‘रक्त मरुस्थल’ (ब्लड डेजर्ट) यानी रक्त-वंचित क्षेत्र कहते हैं। बीएमजे ग्लोबल हेल्थ के अध्ययन में एम्पावर्ड एक्शन ग्रुप (ईएजी) के बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश, ओडिशा, राजस्थान, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों का विश्लेषण किया गया। इसमें पाया गया कि बड़ी आबादी ऐसे क्षेत्रों में रहती है जहां एक घंटे के भीतर भी ब्लड बैंक तक पहुंचना मुश्किल है।
अध्ययन में पाया गया कि ईएजी राज्यों में रक्त की पहुंच बेहद कम है। 60 मिनट की दूरी के भीतर रहने वाली आबादी के लिए औसतन केवल 0.68 यूनिट रक्त प्रति 1,000 आबादी उपलब्ध था। बिहार में उपलब्धता सबसे कम, केवल 0.17 यूनिट प्रति 1,000 आबादी दर्ज की गई।
मध्य प्रदेश में 121 ब्लड बैंक हैं, फिर भी केवल 9.92% आबादी ही 30 मिनट के भीतर रक्त बैंक तक पहुंच पाती है। वहीं, उत्तराखंड में 50 ब्लड बैंक हैं और 47.94 प्रतिशत आबादी 30 मिनट के भीतर रक्त बैंक तक पहुंच सकती है, जबकि 100 प्रतिशत आबादी 60 मिनट के दायरे में कवर हो जाती है। यह दर्शाता है कि प्रभावी वितरण और रणनीतिक स्थान चयन से रक्त सेवाओं की पहुंच को काफी बेहतर बनाया जा सकता है।
मध्य प्रदेश
121 ब्लड बैंक
30 मिनट के भीतर कवरेज: 9.92%
60 मिनट के भीतर कवरेज: 24.32%
90 मिनट के भीतर कवरेज: 40.45%
छत्तीसगढ़
84 ब्लड बैंक
30 मिनट के भीतर कवरेज: 23.83%
60 मिनट के भीतर कवरेज: 52.91%
90 मिनट के भीतर कवरेज: 75.92%
राजस्थान
70 ब्लड बैंक
30 मिनट के भीतर कवरेज: 22.27%
60 मिनट के भीतर कवरेज: 45.31%
90 मिनट के भीतर कवरेज: 75.96%
झारखंड
51 ब्लड बैंक
30 मिनट के भीतर कवरेज: 26.23%
60 मिनट के भीतर कवरेज: 55.11%
90 मिनट के भीतर कवरेज: 91.18%
स्रोत: बीएमजे ग्लोबल हेल्थ
Published on:
14 Jun 2026 02:10 am
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