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राहुल गांधी के खिलाफ जांच पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, इलाहाबाद हाईकोर्ट की कार्यवाही फिलहाल टली

Rahul Gandhi Disproportionate Assets Case: सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी को बड़ी राहत देते हुए आय से अधिक संपत्ति मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की कार्यवाही पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है। कोर्ट ने CBI और ED को भी फिलहाल हाईकोर्ट में कोई जांच रिपोर्ट दाखिल नहीं करने का निर्देश दिया है।
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Aug 17, 2026
Supreme Court Allahabad High Court stay
सुप्रीम कोर्ट से राहुल गांधी को मिली राहत (Photo-IANS)

Rahul Gandhi Supreme Court Relief: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को राहत दी है। कोर्ट ने कांग्रेस नेता के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के आरोपों की जांच से जुड़े मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की कार्यवाही को अगली सुनवाई तक स्थगित कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने CBI और ED को भी निर्देश दिया कि वे फिलहाल इस मामले में हाईकोर्ट के समक्ष कोई रिपोर्ट दाखिल न करें।

सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने राहुल गांधी की याचिका पर सुनवाई की। दरअसल, कांग्रेस सांसद ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें CBI और ED को उनके खिलाफ की गई शिकायत के आरोपों का सत्यापन करने को कहा गया था।

पीठ को बताया गया कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 20 अगस्त को तय की है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि हाईकोर्ट की कार्यवाही अगले आदेश तक स्थगित रहेगी।

CBI और ED को रिपोर्ट दाखिल करने से भी रोका

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय जांच एजेंसियों CBI और ED को भी निर्देश दिया कि वे मामले की जांच या सत्यापन से संबंधित कोई रिपोर्ट फिलहाल इलाहाबाद हाईकोर्ट में पेश न करें। वहीं राहुल गांधी ने एक अलग याचिका भी दाखिल की है, जिसमें उन्होंने इस मामले को इलाहाबाद हाईकोर्ट से दिल्ली हाईकोर्ट स्थानांतरित करने की मांग की है।

कपिल सिब्बल ने बताया 'विच हंट'

कोर्ट में राहुल गांधी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल पेश हुए। सुनवाई के दौरान उन्होंने दलील दी कि हाईकोर्ट में चल रही कार्यवाही कानून के दायरे से बाहर है और यह ऐसी प्रक्रिया के जरिए विच हंट यानी राजनीतिक प्रताड़ना का प्रयास है, जिसे कानून मान्यता नहीं देता।

सिब्बल ने हाईकोर्ट में याचिका दायर करने वाले विग्नेश शिशिर की मंशा और उनकी पात्रता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि शिशिर लगातार राहुल गांधी के खिलाफ याचिकाएं दाखिल करते रहे हैं और उन्होंने यह तथ्य छिपाया कि वे RSS से जुड़े रहे हैं।

केंद्र सरकार ने आरोपों को बताया गंभीर

वहीं कोर्ट में केंद्र सरकार कीओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू पेश हुए। उन्होंने कहा कि CBI केवल शिकायत में लगाए गए आरोपों का सत्यापन कर रही है। उन्होंने आरोपों को बहुत गंभीर बताया।

हाईकोर्ट के याचिकाकर्ता विग्नेश शिशिर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश हुए और राहुल गांधी की याचिका का विरोध किया। उन्होंने तर्क दिया कि FIR दर्ज होने से पहले किसी आरोपी को सुनवाई का अधिकार नहीं होता।

इस पर कपिल सिब्बल ने कहा कि शिशिर ने कोई कैविएट दाखिल नहीं की है और उनकी पेशी के अधिकार पर सवाल उठाया।

सुप्रीम कोर्ट ने प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों पर जोर दिया

सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने कहा कि किसी भी निर्देश को पारित करने से पहले अदालत को प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करना चाहिए। पीठ ने यह भी सवाल उठाया कि यदि आरोप वास्तव में इतने गंभीर थे तो CBI या ED को अदालत के निर्देश का इंतजार क्यों करना पड़ा।

न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची ने टिप्पणी की- अगर मामला इतना गंभीर था तो एजेंसी अब तक चुप क्यों बैठी रही? क्या उसे कार्रवाई के लिए अदालत से प्रेरणा की जरूरत थी?

क्या था इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश?

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि यदि याचिकाकर्ता की शिकायत प्राप्त हुई है तो उसमें लगाए गए आरोपों का कानून के अनुसार सत्यापन किया जाना चाहिए। अदालत ने यह भी कहा था कि CBI और ED कानून के तहत जो भी उचित कदम उठा सकती हैं, वे उठाएं।

हाईकोर्ट ने दोनों एजेंसियों को मामले की प्रगति से अदालत को अवगत कराने का निर्देश दिया था। बाद में 20 जुलाई के आदेश में हाईकोर्ट ने CBI के हलफनामे पर असंतोष जताया। 

इस दौरान कहा कि वह पहले दिए गए निर्देशों के अनुरूप नहीं है। अदालत ने यह भी कहा था कि ED ने आवश्यक कदम उठाए हैं और जांच के दौरान कोई नई जानकारी मिलने पर वह कानून के अनुसार कार्रवाई कर सकती है।

अब सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट में इस मामले की आगे की कार्यवाही अगले आदेश तक नहीं होगी।

Updated on:
17 Aug 2026 12:52 pm
Published on:
17 Aug 2026 12:52 pm