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iPhone 15 पर Apple को बड़ा झटका, ग्राहक को मिलेंगे 45,500 रूपये; जानिए क्यों कोर्ट पहुंचा मामला

Apple India Consumer Court Case: एक ग्राहक ने फोन की लगातार तकनीकी दिक्कतों के बाद Apple के सर्विस सिस्टम पर सवाल उठाए थे। कंपनी ने फोन में अनधिकृत बदलाव का हवाला दिया, लेकिन आयोग के सामने इस दावे को साबित करने के लिए पर्याप्त तकनीकी साक्ष्य पेश नहीं कर सकी।
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भारत

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Manoj Vashisth

Aug 17, 2026

Apple iPhone 15 Refund Case Rohtak

Apple iPhone 15 Refund Case Rohtak :iPhone 15 में ओवरहीटिंग और नेटवर्क की समस्या, उपभोक्ता आयोग ने Apple को दिया बड़ा आदेश (फोटो सोर्स : AI@chatgpt)

Apple iPhone 15 Refund Case Rohtak: महंगा स्मार्टफोन खरीदने के बाद अगर वही फोन बार-बार परेशान करने लगे और कंपनी की सर्विस से भी समाधान न मिले, तो मामला सिर्फ ग्राहक सेवा तक सीमित नहीं रहता। हरियाणा के रोहतक में iPhone 15 से जुड़ा ऐसा ही विवाद जिला उपभोक्ता आयोग तक पहुंचा, जहां ग्राहक के पक्ष में फैसला आया। आयोग ने Apple India की दलीलों को पर्याप्त सबूत न मिलने के कारण खारिज करते हुए ग्राहक को रकम लौटाने और मानसिक परेशानी की भरपाई करने का आदेश दिया।

एक ग्राहक ने फोन की लगातार तकनीकी दिक्कतों के बाद Apple के सर्विस सिस्टम पर सवाल उठाए थे। कंपनी ने फोन में अनधिकृत बदलाव का हवाला दिया, लेकिन आयोग के सामने इस दावे को साबित करने के लिए पर्याप्त तकनीकी साक्ष्य पेश नहीं कर सकी।

64,999 रूपये का फोन, लेकिन बार-बार बढ़ती गई परेशानी

मामला रोहतक के अधिवक्ता राजबीर फोगाट का है। आयोग के 7 अगस्त 2026 के आदेश के मुताबिक, उन्होंने जनवरी 2024 में 64,999 रूपये में iPhone 15 खरीदा था। शिकायत के अनुसार फोन इस्तेमाल शुरू करने के बाद ही उसमें कई तरह की परेशानियां सामने आने लगीं।

फोन गर्म होने के साथ-साथ Bluetooth कनेक्टिविटी और मोबाइल नेटवर्क को लेकर दिक्कतें आने लगीं। कॉल ड्रॉप की समस्या ने परेशानी और बढ़ा दी। चूंकि फोन महंगा था और कामकाज के लिए भी इस्तेमाल होता था, इसलिए ग्राहक ने समस्या का समाधान कराने के लिए Apple के अधिकृत सर्विस सेंटर का रुख किया।

सेटिंग बदली, अपडेट कराया… फिर भी नहीं सुधरा फोन

शिकायतकर्ता के मुताबिक, पहली बार सर्विस सेंटर पहुंचने पर एक कर्मचारी ने फोन की कुछ सेटिंग्स में बदलाव किया और भरोसा दिलाया कि समस्या दूर हो जाएगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

इसके बाद ग्राहक ने दोबारा सर्विस सेंटर से संपर्क किया। उसे Apple के कस्टमर केयर से बात करने को कहा गया। 29 अप्रैल 2024 को Apple कस्टमर केयर से बातचीत के बाद निर्देशानुसार फोन अपडेट किया गया। ग्राहक को बताया गया कि अपडेट के बाद नेटवर्क और कॉल ड्रॉप की समस्या खत्म हो जाएगी।

लेकिन अपडेट के बाद भी परेशानी बनी रही।

Cloud खरीदा, नेटवर्क कंपनी भी बदली, लेकिन नतीजा शून्य

मामला यहीं नहीं रुका। शिकायतकर्ता के अनुसार, सर्विस सेंटर की ओर से iCloud स्टोरेज लेने की सलाह भी दी गई। इसके बाद उन्होंने 31 मई 2024 को 75 रूपये प्रति माह की दर से iCloud स्टोरेज खरीदा।

जब इससे भी समस्या हल नहीं हुई तो नेटवर्क कनेक्शन बदलने की सलाह दी गई। शिकायतकर्ता ने Jio से Airtel पर भी स्विच किया। इसके बावजूद फोन की नेटवर्क संबंधी शिकायत दूर नहीं हुई।

यानी ग्राहक ने सॉफ्टवेयर अपडेट से लेकर क्लाउड स्टोरेज और नेटवर्क बदलने तक कई उपाय आजमाए, लेकिन फोन की मूल समस्या बनी रही।

Apple ने पलटकर लगाया फोन से छेड़छाड़ का आरोप

उपभोक्ता आयोग के सामने Apple India ने फोन में निर्माण संबंधी खराबी होने से इनकार किया। कंपनी का कहना था कि डिवाइस में अनधिकृत बदलाव किए गए थे और इसी वजह से वारंटी का लाभ नहीं दिया जा सकता।

Apple के मुताबिक, अधिकृत सर्विस सेंटर की जांच में फोन के बटनों में धूल के कण, कथित तौर पर अनधिकृत रियर कैमरा लेंस और बैक ग्लास, बॉडी पर खरोंच तथा रियर माइक्रोफोन से जुड़ी समस्या दर्ज की गई थी।

कंपनी ने यह भी कहा कि ग्राहक को फोन को आगे की तकनीकी जांच के लिए रिपेयर सेंटर भेजने का विकल्प दिया गया था, लेकिन उसने इसे स्वीकार नहीं किया।

आयोग ने पूछा अगर छेड़छाड़ हुई थी तो सबूत कहां है?

यहीं से मामले में सबसे अहम मोड़ आया। आयोग ने पाया कि ग्राहक ने अपनी शिकायत के समर्थन में टैक्स इनवॉयस, असफल कॉल के स्क्रीनशॉट और जून 2024 की सर्विस जॉब शीट पेश की थी। जॉब शीट में नेटवर्क, फोन गर्म होने और Bluetooth से जुड़ी शिकायतों का उल्लेख था।

दूसरी ओर, Apple और उसके अधिकृत सर्विस सेंटर ने फोन में कथित अनधिकृत बदलाव का हवाला तो दिया, लेकिन उसे साबित करने के लिए मजबूत तकनीकी प्रमाण पेश नहीं किए।

आयोग ने खास तौर पर इस बात को महत्व दिया कि फोन ग्राहक को बिना समस्या ठीक किए वापस कर दिया गया था।

इंजीनियर का बयान और विशेषज्ञ रिपोर्ट भी नहीं थी

आयोग की पीठ ने यह भी नोट किया कि जिस तकनीकी कर्मचारी या इंजीनियर ने फोन की जांच की थी, उसका शपथपत्र रिकॉर्ड पर नहीं रखा गया। इसके अलावा किसी स्वतंत्र विशेषज्ञ की रिपोर्ट भी पेश नहीं की गई, जिससे कथित छेड़छाड़ की पुष्टि हो सके।

सिर्फ सर्विस जॉब शीट में कोई टिप्पणी दर्ज कर देना पर्याप्त नहीं माना गया।

आयोग ने यह भी कहा कि उपलब्ध तस्वीरें कथित अनधिकृत बदलाव को निर्णायक रूप से साबित नहीं करती थीं। इसलिए केवल आंतरिक सर्विस रिकॉर्ड के आधार पर ग्राहक की वारंटी सेवा रोकने को उचित नहीं माना जा सकता।

Apple को पूरी 64,999 रकम नहीं, फिर भी देना होगा 45,500

आयोग ने Apple India को ग्राहक को पूरी खरीद कीमत लौटाने का आदेश नहीं दिया। फोन के इस्तेमाल और मूल्य में आई कमी को देखते हुए 30 प्रतिशत मूल्यह्रास (Depreciation) काटने का फैसला किया गया।

इसके बाद ग्राहक को मिलने वाली रकम तय हुई 45,500 रूपये ।

इसके अलावा Apple को:

रूपये 5,000 रूपये 5,000 मानसिक परेशानी और उत्पीड़न के मुआवजे के रूप में और 5,000 रूपये मुकदमेबाजी खर्च के तौर पर देने का निर्देश दिया गया है।

इस तरह आदेश के तहत Apple पर कुल भुगतान ₹55,500 का प्रभाव पड़ता है, जिसमें ₹45,500 की वापसी, ₹5,000 मुआवजा और ₹5,000 कानूनी खर्च शामिल हैं।

45,500 रूपये की रकम पर 10 जून 2024 से भुगतान होने तक 9 प्रतिशत सालाना ब्याज भी देना होगा। ग्राहक को भुगतान के समय संबंधित iPhone Apple को सौंपना होगा। आदेश की प्रति मिलने के एक महीने के भीतर इसका पालन करना होगा।