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ड्रग तस्करी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, इस आधार पर आरोपी की जमानत याचिका की खारिज

Drug Trafficking: सुप्रीम कोर्ट ने एमडीएमए तस्करी मामले में आरोपी की जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि ड्रग्स का कारोबार करने वाले देश के युवाओं का भविष्य बर्बाद कर रहे हैं और उनसे सख्ती से निपटना जरूरी है।

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Jun 03, 2026
Supreme Court
सुप्रीम कोर्ट

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने मादक पदार्थों की तस्करी में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि ऐसे अपराधियों से बेहद सख्ती से निपटने की जरूरत है क्योंकि वे देश के युवाओं का जीवन पीढ़ी दर पीढ़ी बर्बाद कर रहे हैं। जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस शील नागू और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने मंगलवार को एनडीपीएस अधिनियम, 1985 के तहत जून 2022 में गिरफ्तार एक आरोपी की जमानत याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। जस्टिस नाथ ने कहा, 'ड्रग्स का कारोबार करने वालों से बहुत सख्त हाथों से निपटना होगा। वे इस देश के युवाओं की जिंदगी लगातार बर्बाद कर रहे हैं।'

आरोपी ने मद्रास हाईकोर्ट के फरवरी के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी। हाईकोर्ट ने कहा था कि यह मामले में उसकी लगातार छठी जमानत अर्जी थी। अभियोजन के अनुसार 11 जून 2022 को आरोपी और उसके दो साथी एक बैग के साथ खड़े थे। पुलिस को देखकर वे भागने लगे। तलाशी में बैग से करीब 10.15 ग्राम 21 एमडीएमए (एक्स्टेसी) गोलियां बरामद हुई थीं।

व्यावसायिक मात्रा और लंबित सुनवाई का तर्क भी नहीं चला

हाईकोर्ट में बचाव पक्ष ने दलील दी थी कि बरामद नशीला पदार्थ 5 जुलाई 2022 को विशेष अदालत में पेश किया गया और उससे पहले बिना उचित अनुमति पुलिस के कब्जे में रहा। यह भी कहा गया कि नवंबर 2024 में छह माह में मुकदमा पूरा करने का निर्देश दिए जाने के बावजूद सुनवाई लंबित है तथा सह-आरोपियों को जमानत मिल चुकी है। हालांकि राज्य सरकार ने कहा कि बरामद एमडीएमए व्यावसायिक श्रेणी की मात्रा में था और अपराध में तीन लोग शामिल थे। हाईकोर्ट और बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी जमानत देने से इनकार कर दिया।

क्या है एनडीपीएस अधिनियम 1985?

NDPS Act 1985 (नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस एक्ट, 1985) भारत का एक सख्त कानून है, जिसे नशीले पदार्थों की तस्करी, उत्पादन, बिक्री और उपयोग पर रोक लगाने के लिए बनाया गया है। यह कानून गांजा, हेरोइन, अफीम, कोकीन, एमडीएमए जैसे ड्रग्स से जुड़े अपराधों पर लागू होता है। इसमें अपराध की गंभीरता के अनुसार सजा और जुर्माने का प्रावधान है, जिसमें कई मामलों में 10 से 20 साल तक की सजा और भारी जुर्माना शामिल है। “कमर्शियल क्वांटिटी” वाले मामलों में जमानत मिलना कठिन होता है। इसका उद्देश्य समाज को नशे के खतरे से बचाना है।

Published on:
03 Jun 2026 02:18 am
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