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SIR विवाद पर पूर्व CEC एसवाई कुरैशी का बड़ा बयान, बोले- कानून का उल्लंघन गंभीर मामला, बहुमत के बिना लिए गए फैसले गैरकानूनी

SIR controversy Row: SIR प्रक्रिया को लेकर जारी विवाद के बीच पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी ने कहा कि वह शुरुआत से ही SIR और उससे जुड़ी प्रक्रियाओं की आलोचना करते रहे हैं। दो चुनाव आयुक्तों द्वारा कथित तौर पर आपत्तियां दर्ज किए जाने की रिपोर्ट पर भी उन्होंने प्रतिक्रिया दी।
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former CEC SY Quraishi on SIR controversy Row:
पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी (फोटो- idea.int)

SY Quraishi on SIR controversy Row: पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त डॉ. एसवाई कुरैशी ने इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) और चुनाव आयोग की अंदरूनी प्रक्रियाओं के बारे में किए गए दावों पर प्रतिक्रिया दी है। कुरैशी ने कहा कि पिछले डेढ़ साल से चुनाव आयोग के भीतर नियमों और कानूनों की खुलेआम अनदेखी गंभीर मामला है। उन्होंने कहा कि अगर आयोग के फैसले आम सहमति या दो सदस्यों के बहुमत के बिना लिए गए हैं, तो वे पूरी तरह से गैर-कानूनी और अवैध हैं और उन्हें तुरंत वापस लिया जाना चाहिए।

टी.एन. शेषन के दौर में भी नहीं देखी गई ऐसी मनमानी: कुरैशी

डॉ. कुरैशी ने कहा कि 1993 में आयोग को तीन सदस्यों वाला निकाय बनाया गया था ताकि कोई भी व्यक्ति खुद को सबसे ऊपर न समझे। तीनों सदस्यों के पास समान अधिकार और वोटिंग की शक्ति होती है। उन्होंने बताया कि सामने आई जानकारी के अनुसार, दोनों चुनाव आयुक्त लगातार सिस्टम पर सवाल उठा रहे थे लेकिन उन्हें भरोसे में नहीं लिया गया, आयोग की बैठकें चार महीने तक नहीं बुलाई गईं।

कुरैशी ने कहा कि ऐसी प्रशासनिक मनमानी तो टी.एन. शेषन के दौर में भी नहीं थी, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने 1995 में फैसला सुनाया था कि लोकतंत्र में एक ही व्यक्ति के हाथों में असीमित शक्ति का होना सही नहीं है।

चुनाव आयुक्तों ने संवैधानिक मर्यादा का पालन किया :कुरैशी

पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि वे शुरू से ही SIR की प्रक्रिया और इसमें बरती जा रही अनियमितताओं की आलोचना कर रहे थे। उन्होंने कहा कि पहले वे सोच रहे थे कि दोनों चुनाव आयुक्त चुप क्यों हैं, जबकि उनके पास बहुमत है और वे निर्णय को प्रभावित कर सकते हैं। लेकिन अब जब यह साफ हुआ है कि वे अपनी फाइल नोटिंग्स और आधिकारिक पत्रों के जरिए विरोध दर्ज करा रहे थे, तो उनके प्रति सम्मान और बढ़ गया है। संविधान चुनाव आयोग से पूर्ण निष्पक्षता की अपेक्षा करता है और दोनों आयुक्तों ने आंतरिक स्तर पर आवाज उठाकर संवैधानिक मर्यादा का पालन किया।

सुप्रीम कोर्ट को फैसलों की लिस्ट मंगवानी चाहिए : कुरैशी

डॉ. कुरैशी ने इस पूरे मामले में पारदर्शिता की मांग की है। उन्होंने कहा कि भारत एक जीवंत लोकतंत्र है, कोई 'बनाना रिपब्लिक' नहीं है। सुप्रीम कोर्ट को पिछले डेढ़ साल में लिए गए सभी फैसलों की लिस्ट मंगवानी चाहिए और उसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए। अगर फैसले सर्वसम्मति या बहुमत से हुए हैं तो वे वैध हैं, लेकिन यदि आयुक्तों की आपत्तियों को दरकिनार कर और उन्हें बायपास करके फैसले थोपे गए हैं, तो वे पूरी तरह अवैध हैं।

तीनों सदस्यों से प्रेस कांफ्रेंस की मांग

डॉ कुरैशी ने मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों को चुनौती दी कि वे एक साथ मंच पर आएं और संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर देश को बताएं कि आज की रिपोर्ट गलत है और वाकई सभी फैसले सर्वसम्मति से हुए हैं। अगर ऐसा है तो वे खुद उनके काम की सराहना करेंगे और ताली बजाएंगे।

Updated on:
23 Sept 2026 02:58 pm
Published on:
23 Sept 2026 02:56 pm