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तमिलनाडु चुनाव: चेन्नई में नई चुनावी बयार, गढ़ बचाने के लिए DMK ने दिया ‘दिल्ली बनाम द्रविड़ अस्मिता का नाम’

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 (Tamil Nadu Assembly Elections) के लिए प्रचार-प्रचार चरम पर है। इस बार के चुनाव में चेन्नई की कुल 16 विधानसभा सीटों में से अधिकांश सीटों पर कई दशक बाद मुकाबला त्रिकोणीय हुआ है। त्रिकोणीय मुकाबले में इस बार के चुनाव और अधिक दिलचस्प बना दिया है।

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Apr 20, 2026
Tamil Nadu Elections 2026
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 (सांकेतिक इमेज)

Tamil Nadu Assembly Elections 2026: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के लिए प्रचार-प्रचार चरम पर है। चुनावी माहौल के बीच चेन्नई में देश के सबसे पुराने चेपक क्रिकेट स्टेडियम से करीब 2 किलोमीटर की दूरी पर रविवार को करीब 7 बजे जेमिनी ब्रिज और आइस हाउस इलाके में वाहनों की लंबी कतारें, जाम से त्रस्त लोग और फिल्मी गानों पर नाचते-गाते TVK के समर्थकों को देखकर एक अलग क्षवि दिखाई दी। इस विधानसभा क्षेत्र में कई मुद्दों को लेकर DMK के प्रति लोगों में नाराजगी है।

त्रिकोणीय भंवर में उलझी राजनीति

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन को कोलाथुर विधानसभा क्षेत्र में कोई खास चुनौती नहीं है, लेकिन चेन्नई की कुल 16 में से अधिकांश सीटों पर कई दशक बाद मुकाबला त्रिकोणीय हुआ है। जयललिता ने 2011 में DMK के इस किले को ध्वस्त करके 14 सीटें जीती थीं। इसके अलावा इस इलाके के सीधे मुकाबले में DMK का पलड़ा भारी रहा है। सत्ता के खिलाफ असंतोष, AIADMK-भाजपा गठबंधन और तमिल एक्टर थलापति विजय की राजनीति में एंट्री ने नए चुनावी समीकरण को जन्म दिया है।

थलापति विजय खुद पेरम्बूर से चुनाव लड़ रहे हैं और कई सीटों पर उनके उम्मीदवार DMK को चुनौती दे रहे हैं। सीमॉन की पार्टी NTK भी कुछ सीटों पर चुनाव को दिलचस्प बना रही है। बदले सियासी समीकरण में खुद TVK प्रमुख विजय, भाजपा उम्मीदवार तमिलइसै सौंदरराजन, AIADMK प्रत्याशी डी. जयकुमार समेत कई दिग्गज 8 से 10 सीटों पर कड़े त्रिकोणीय संघर्ष में फंसे हैं।

द्रविड़ दलों की जड़ें गहरी, पर सियासत ले रही नई करवट

स्थानीय कारोबारी कुतुबुद्दीन दावा करते हैं कि विजय चुनाव के बाद वापस फिल्मी दुनिया का रुख कर लेंगे। द्रविड़ दलों की जड़ें काफी गहरी हैं और विजय को जमीनी सपोर्ट नहीं है। केवल प्रशंसक ही उनका समर्थन करेंगे। हालांकि, विकल्प तलाश रहे युवाओं का झुकाव विजय की ओर है। इसी तरह CCTV नेटवर्किंग के अलावा पार्ट टाइम बाइक टैक्सी चलाने वाले जयपाल सी. शहर में निरंतर जाम की समस्या से परेशान हैं और विजय से बदलाव की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

विपक्ष स्थानीय, सत्तापक्ष का केंद्र के मुद्दे पर वार

अन्नाद्रमुक समर्थक कानून-व्यवस्था का मुद्दा प्रमुखता से उठा रहे हैं। चेन्नई में 6 दशक से रह रहे सोजत राजस्थान के राजेश कुमार ड्रग्स और नशे की बढ़ती लत की शिकायत करते हैं। विपक्ष स्थानीय मुद्दों पर जोर दे रहा है और बुनियादी ढांचे में कमी को लेकर सवाल पूछे जा रहे हैं, लेकिन सत्तारूढ़ द्रमुक चुनाव को केंद्र बनाम राज्य की लड़ाई का रंग दे रहा है। द्रविड़ अस्मिता की बात जोर-शोर से उठाई जा रही है, परिसीमन और भाषाई मुद्दे प्रमुख चुनावी हथियार बन गए हैं। राह किसी की भी आसान नहीं है औए नए चुनावी समीकरण में द्रमुक के लिए सभी सीटें जीतकर पिछला प्रदर्शन दोहराना मुश्किल है।

चुनावी आंकड़ों में DMK की मजबूत स्थिति

  • चुनाव वर्ष 2011: AIADMK- 14 सीट, DMK- 2
  • चुनाव वर्ष 2016: DMK- 10 सीट, AIADMK- 6
  • चुनाव वर्ष 2021: DMK- 16 सीट, AIADMK- 0
Published on:
20 Apr 2026 03:59 am
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