
Tarun Tejpal sentenced: यौन उत्पीड़न मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा 10 साल की सजा सुनाए जाने के बाद तहलका के पूर्व संपादक तरुण तेजपाल ने प्रतिक्रिया दी है। तरुण तेजपाल ने कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट से राहत की मांग करेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि वह राजनीतिक बदले की भावना का शिकार हुए हैं।
तरुण तेजपाल ने कहा कि हम सुप्रीम कोर्ट जाएंगे, सौ फीसदी जाएंगे। मुझे कोई शक नहीं है। पिछले 13 सालों से, तहलका के काम की वजह से राजनीतिक बदले की भावना से वे मेरे पीछे पड़े हैं। हमने साढ़े सात साल तक ट्रायल कोर्ट में केस लड़ा और बरी हो गए। अब वे फिर मेरे पीछे पड़े हैं। जो उनके साथ होते हैं, उन्हें वे बरी कर देते हैं, लेकिन जो कभी उनके ख़िलाफ़ पत्रकारिता करते हैं या उनके ख़िलाफ़ कुछ कहते हैं, उनके पीछे पड़ जाते हैं। आप पत्रकार हैं, जाकर देखिए कि पिछले 12 सालों में उन्होंने कितने लोगों को झूठे केस में फंसाया है। उन्होंने मुझे भी फंसाया, लेकिन फिर भी मैं बरी हो गया।
तेजपाल ने आगे कहा कि अब पत्रकारों पर निर्भर करता है कि वे जाकर सवाल पूछें। आप जानते हैं कि उमर खालिद 6 साल से जेल में हैं। आप जानते हैं कि शरजील इमाम वहां हैं, आप जानते हैं कि सुरेंद्र गाडलिंग अलग-अलग केस में जेल में हैं। उन्होंने आगे कहा कि यह सच है कि तहलका ने पत्रकारिता की और ऐसी पत्रकारिता की जिससे निहित स्वार्थों, राजनीतिक हितों को नुकसान पहुंचा। इसी वजह से, बदले की भावना से वे 13 साल से हमारे पीछे पड़े हैं।
उन्होंने मेरी पत्रकारिता रोक दी, तहलका बंद करवा दिया, मेरी किताबों की छपाई रोक दी। लेकिन हम लड़ेंगे, मुझे पूरा भरोसा है कि इतनी बड़ी न्यायपालिका में ऐसे जज हैं जो सच देखेंगे और सच साफ तौर पर सामने आएगा। अगर आप लोग मुझसे बात करना बंद करके कोर्ट में सबूत देखें, तो इतने सबूत हैं कि मुझे एक बार नहीं, बल्कि 10 बार बरी किया जाना चाहिए। हम उन सबूतों को जनता के सामने लाएंगे, कोई दिक्कत नहीं है।
बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा बेंच ने गुरुवार को 'तहलका' के पूर्व एडिटर तरुण तेजपाल को 2013 में उनकी जूनियर सहयोगी द्वारा दर्ज कराए गए यौन उत्पीड़न के मामले में 10 साल की जेल की सजा सुनाई। इससे पहले, कोर्ट ने 'तहलका' के पूर्व एडिटर तरुण तेजपाल को उनकी जूनियर सहयोगी द्वारा 2013 में दर्ज कराए गए यौन उत्पीड़न के मामले में दोषी ठहराया था।
बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा बेंच ने गोवा सरकार की उस अपील पर यह फैसला सुनाया, जिसमें 2021 में गोवा सेशंस कोर्ट द्वारा तेजपाल को बरी किए जाने को चुनौती दी गई थी। यह मामला एक महिला पत्रकार के आरोपों से जुड़ा है, जिसने आरोप लगाया था कि तेजपाल ने 7 और 8 नवंबर, 2013 को एक होटल की लिफ्ट में उसका यौन उत्पीड़न किया था। इन आरोपों के चलते तेजपाल को 30 नवंबर, 2013 को गिरफ्तार किया गया था।
29 सितंबर, 2017 को कोर्ट ने उन पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप तय किए, जिनमें रेप, यौन उत्पीड़न और गलत तरीके से बंधक बनाना शामिल था। मई 2021 में, गोवा सेशंस कोर्ट ने तेजपाल को सभी आरोपों से बरी कर दिया और कहा कि अभियोजन पक्ष अपने मामले को बिना किसी उचित संदेह के साबित करने में विफल रहा है। ट्रायल कोर्ट ने मेडिकल सबूतों की कमी पर ध्यान दिया और शिकायतकर्ता व तेजपाल के बीच हुए संदेशों के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला कि वे इस दावे का समर्थन नहीं करते कि कथित हमले से वह सदमे में थीं। इसके बाद गोवा सरकार ने ट्रायल कोर्ट के फ़ैसले को रद्द कराने के लिए बॉम्बे हाई कोर्ट में बरी किए जाने के फैसले को चुनौती दी थी।