
लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य
Rohini Acharya on Jitan Ram Manjhi: बिहार के जमुई में नाबालिग छात्रा के साथ छेड़खानी और मुख्य आरोपी नंदन यादव के पुलिस मुठभेड़ में घायल होने के बाद आरोपी की जाति पर सियासी घमासान छिड़ गया है। केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी द्वारा इस घटना को 'यादव' समाज से जोड़ने के बाद लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने पलटवार किया है। रोहिणी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि उम्र के साथ केंद्रीय मंत्री का मानसिक संतुलन और राजनीतिक विवेक डगमगा गया है और उन्हें अपनी इस दिमागी हालत का इलाज कराना चाहिए।
केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा था, "HAM बोलते नहीं करके दिखलाते हैं। जमुई वाले मामले की जानकारी तो सबको लग ही गई होगी। पर इसमें हम आपको लेटेस्ट जानकारी दे देते हैं। तेजस्वी जी कहते रहे हैं ना कि बिहार-यूपी का हर 'यादव' उनका भाई है। तो उन्हीं भाइयों में से कुछ भाइयों ने जमुई में लड़की छेड़कर वीडियो बनाया था ताकि हमारी सरकार को बदनाम किया जा सके।"
जीतन राम मांझी ने आगे लिखा, "अब तेजस्वी यादव कहेंगे कि देखिए ना सम्राट चौधरी ने मेरे भाई को ठोकवा दिया। मैं अभी भी कहूंगा तेजस्वी जी अपने भाइयों को सचेत कर दीजिए, नहीं तो सम्राट की सरकार किसी को बख्शने वाली नहीं है। सम्राट का सुशासन है भाई।"
जीतन राम मांझी के इस पोस्ट पर बिना नाम लिए प्रहार करते हुए रोहिणी आचार्य ने लिखा, "बिहार से आने वाले एक उम्रदराज केंद्रीय मंत्री का सोशल मीडिया पर एक पोस्ट देखकर ऐसा लगता है कि बढ़ती उम्र के साथ-साथ उनका मानसिक संतुलन और राजनीतिक विवेक भी पूरी तरह से डगमगा चुका है। जमुई जैसी संवेदनशील और घिनौनी घटना पर दुख जताने या सख्त कार्रवाई की बात करने की बजाय ओछी और घटिया बयानबाजी पर उतर आए हैं मंत्री महोदय।"
रोहिणी ने कहा कि किसी अपराधी का न तो कोई धर्म होता है और न ही कोई जाति, लेकिन मंत्री महोदय ने जिस तरह से एक अपराधी की हरकत को पूरी 'यादव' जाति से जोड़कर कटघरे में खड़ा करने का प्रयास किया है, वह उनकी बेहद ओछी और जहरीली मानसिकता को दिखाता है। उन्होंने सवाल किया कि क्या कोई अपराधी किसी जाति विशेष का प्रतिनिधि होता है?
रोहिणी आचार्य ने आगे लिखा, "बिहार और देश के हर राजनीतिक दल में हर जाति के लोग शामिल हैं। यादव समाज के लोग सिर्फ एक पार्टी में नहीं, बल्कि बीजेपी, जदयू, हम और हर राजनीतिक दल में मौजूद हैं। तो क्या ऐसे में किसी एक अपराधी के गुनाह के लिए उस पूरी जाति या उस जाति के तमाम नेताओं और उस दल को जिम्मेदार ठहरा दिया जाएगा?"
संवैधानिक पद की गरिमा को लेकर रोहिणी आचार्य ने कहा कि मंत्री पद पर बैठे किसी व्यक्ति द्वारा ऐसी भाषा का इस्तेमाल करना अत्यंत निंदनीय है। उन्होंने नसीहत दी कि मंत्री महोदय को अपनी इस बिगड़ती दिमागी हालत और ओछी बयानबाजी की बीमारी का इलाज कराना चाहिए। उन्होंने कहा कि न्याय का असल मतलब अपराधियों को सजा देना होता है, किसी पूरी जाति को बदनाम और टारगेट करना नहीं।
Updated on:
22 Sept 2026 04:53 pm
Published on:
22 Sept 2026 04:53 pm
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