
N Chandrasekaran: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के एक फैसले के बाद टाटा समूह के शीर्ष नेतृत्व में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। टाटा संस के बोर्ड ने एन चंद्रशेखरन को फिर से पांच साल के लिए कंपनी का चेयरमैन नियुक्त करने के पक्ष में मतदान किया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब कुछ ही सप्ताह पहले चंद्रशेखरन ने निदेशकों को सूचित किया था कि वह तीसरे कार्यकाल के लिए पद संभालने के इच्छुक नहीं हैं।
नेतृत्व में इस बड़े बदलाव की मुख्य वजह आरबीआई द्वारा टाटा संस के गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) रजिस्ट्रेशन को सरेंडर करने के आवेदन को खारिज करना है। पिछले सप्ताह आए इस फैसले के बाद अब टाटा संस को भारतीय शेयर बाजार में सूचीबद्ध (लिस्ट) होना पड़ सकता है। कंपनी पिछले एक साल से अधिक समय से लिस्टिंग से बचने का प्रयास कर रही थी और इसके लिए उसने 21,000 करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज भी चुकाया था।
बोर्ड के सदस्यों का मानना है कि संभावित आईपीओ (IPO) से पहले नेतृत्व में निरंतरता होना बेहद जरूरी है। इससे निवेशकों के बीच सकारात्मक संदेश जाएगा और उनका भरोसा मजबूत होगा। किसी भी कंपनी के शेयर बाजार में उतरने से पहले संभावित निवेशक प्रबंधन की स्थिरता और स्पष्ट दिशा को प्राथमिक शर्त मानते हैं।
टाटा संस की नामांकन एवं पारिश्रमिक समिति (एनआरसी) जल्द ही 63 वर्षीय एन चंद्रशेखरन से मुलाकात करेगी। समिति उनसे अगस्त में लिए गए अपने फैसले पर पुनर्विचार करने का अनुरोध करेगी। चंद्रशेखरन ने अपना पिछला फैसला आरबीआई के रुख और कंपनी की नियामक स्थिति के बारे में बनी पुरानी धारणाओं के आधार पर लिया था, जो अब पूरी तरह बदल चुकी हैं।
एन चंद्रशेखरन ने 12 अगस्त को ही टाटा संस के बोर्ड को जानकारी दे दी थी कि 20 फरवरी 2027 को मौजूदा कार्यकाल समाप्त होने के बाद वह इस पद पर आगे बने रहने के इच्छुक नहीं हैं। यह निर्णय उनके भविष्य को लेकर महीनों से जारी अनिश्चितता के बाद सामने आया था। इससे पहले फरवरी 2026 में हुई बोर्ड बैठक के दौरान उन्हें अगले पांच साल का सेवा विस्तार देने के प्रस्ताव पर सर्वसम्मति नहीं बन सकी थी। इसके बाद चंद्रशेखरन ने इस पर फैसला टाल दिया था, लेकिन अगस्त तक छह महीने बीत जाने के बावजूद कोई आम सहमति न बनने पर उन्होंने पद छोड़ने की बात कही। उनके इस कदम के बाद समूह में नए प्रमुख की तलाश की प्रक्रिया शुरू हो गई थी। सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट ने चंद्रशेखरन के उत्तराधिकारी का चुनाव करने के लिए एक चयन समिति गठित करने की पहल भी कर दी थी।