
Tejashwi Yadav on SIR Row: राष्ट्रीय जनता दल (RJD) नेता तेजस्वी यादव ने वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न (SIR) और चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर एक अखबार की रिपोर्ट के बाद केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर हमला बोला है। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि देश के संविधान और लोकतंत्र को सुनियोजित तरीके से कमजोर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हाल के चुनावों में विपक्ष जनता से नहीं हारा, बल्कि चुनाव आयोग की मशीनरी के गलत इस्तेमाल से भारतीय जनता पार्टी (BJP) को मनमानी जीत दिलाई गई।
तेजस्वी यादव ने अखबार की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि दो चुनाव आयुक्तों ने पिछले 10 महीनों में 14 बार आधिकारिक पत्राचार और नोटिंग्स के जरिए आयोग के कामकाज पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि यह लोकतंत्र के लिए सबसे चिंताजनक स्थिति है कि पूर्ण आयोग को दरकिनार कर फैसले लिए गए।
तेजस्वी ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग द्वारा जारी किया गया आधिकारिक प्रेस नोट स्वतंत्र नहीं है, बल्कि वही बात दोहराता है जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह चाहते हैं। उन्होंने कहा कि बिहार में जब पहली बार SIR शुरू हुआ था, तभी राजद ने सड़क से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक इसके खिलाफ लड़ाई लड़ी थी क्योंकि इसके जरिए मतदाताओं के नाम छांटे जा रहे थे।
तेजस्वी यादव ने चुनावी पारदर्शिता और नियमों में बदलाव को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने बताया कि पहले वोटिंग और वोटों की गिनती की वीडियो रिकॉर्डिंग और संबंधित रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने की कानूनी अवधि एक साल थी। लेकिन अब इसे घटाकर सिर्फ 45 दिन कर दिया गया है।
तेजस्वी ने सवाल किया कि 45 दिनों के बाद रिकॉर्ड और फुटेज नष्ट होने पर कोई राजनीतिक पार्टी या उम्मीदवार अदालत में कुछ कैसे साबित कर सकता है। उन्होंने तर्क दिया कि बिना सबूत के अदालत जाना बेकार होगा, जिससे पता चलता है कि चुनावी अनियमितताओं को छिपाने की जानबूझकर कोशिश की जा रही है।
मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) की नियुक्ति प्रक्रिया का ज़िक्र करते हुए तेजस्वी यादव ने कहा कि भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सिलेक्शन कमेटी का हिस्सा हुआ करते थे। लेकिन केंद्र सरकार ने कानून बदलकर CJI की जगह केंद्रीय मंत्री को शामिल कर लिया। उन्होंने तंज कसा कि अब सरकार जिसे चाहेगी उसी को पद पर बैठाएगी, एक अधिकारी हटेंगे तो उनकी जगह दूसरा पसंदीदा अधिकारी ले आया जाएगा।
तेजस्वी यादव ने दावा किया कि बिहार और पश्चिम बंगाल में निष्पक्ष चुनाव नहीं हुए हैं, इसलिए इन दोनों राज्यों में प्रक्रिया की विश्वसनीयता बहाल करने के लिए दोबारा निष्पक्ष चुनाव कराए जाने चाहिए।