Tamil Nadu Assembly Election: थलापति विजय की एंट्री से तमिलनाडु में सियासी समीकरण बदल गए हैं। राज्य में दोनों मुख्य राजनीतिक दलों के लिए वह चुनौती हैं।
तमिलनाडु के शहरों, गलियों और चौराहों पर अभिनेता से नेता बने विजय का डायलॉग "ओंगा विजय, ना वरें विसिल अडिक्का रेडीया…?" गूंज रहा है। इसका मतलब है, "आपका विजय, मैं आ रहा हूं, सीटी बजाने के लिए तैयार हैं?" राजनीति में उनकी एंट्री से समीकरण उलझ गए हैं। पूरे राज्य में प्रभाव दिख रहा है, लेकिन नतीजों का अनुमान मुश्किल है। रोड शो में उमड़ने वाली भीड़ उत्साह और जुनून से भरी होती है। विरोधी उन्हें ‘खेल बिगाड़ने वाला’, जबकि समर्थक ‘थलापति’ कहते हैं।
हालांकि विजय की पार्टी टीवीके की चुनावी मशीनरी कमजोर है। बूथ प्रबंधन और जमीनी नेटवर्क में वह स्थापित राजनीतिक दलों से पीछे हैं। युवा उन्हें विकल्प मान रहे हैं, लेकिन परिपक्व मतदाता अभी आश्वस्त नहीं हैं। विजय पेरम्बूर और तिरुचिरापल्ली से चुनाव लड़ रहे हैं। पेरम्बूर में डीएमके के आरडी शेखर से सीधा मुकाबला है, जबकि तिरुचिरापल्ली में त्रिकोणीय संघर्ष है। टीवीके सभी 234 सीटों पर चुनाव लड़कर मुकाबले को कई जगह बहुकोणीय बना रही है।
सबसे बड़ा सवाल है कि विजय की एंट्री से नुकसान किसे होगा? विजय के निशाने पर सत्तारूढ़ डीएमके है और वह अल्पसंख्यक मतों में सेंध लगा रहे हैं। साथ ही सत्ता विरोधी वोट, जो एआईएडीएमके को मिल सकता था, वह भी बंट रहा है। इससे दोनों द्रविड़ दलों को नुकसान संभव है। अनुमान है कि टीवीके को 16-18% वोट मिल सकते हैं, जो समीकरण बदलने के लिए पर्याप्त हैं।
टीवीके समर्थक इसे सीधी टक्कर बताते हैं। पेरम्बूर स्थित कार्यालय के बाहर तमिलसेल्वी कहते हैं, "सिर्फ दो ही लोगों के बीच टक्कर है, एक टीवीके, एक डीएमके। विजय थलापति हैं, थलापति रहेंगे।" वहीँ स्थानीय कार्यकर्ताओं का दावा है कि वह पैसे देकर भीड़ नहीं जुटाते और कई बार प्रशासन को भीड़ के कारण कार्यक्रम रद्द करने पड़ते हैं। समर्थकों का यह जुनून वोट में कितना बदलेगा, कहना मुश्किल है, लेकिन इतना तय है कि विजय की एंट्री चुनावी नतीजों को प्रभावित ज़रूर करेगी।