
कांग्रेस नेता अलका लांबा। ( फोटो : ANI)
Alka Lamba: कांग्रेस की दिग्गज नेता और पूर्व विधायक अलका लांबा को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट से बड़ी राहत मिली है, लेकिन उनकी कानूनी लड़ाई अभी थमी नहीं है। अदालत ने शनिवार 6 जून को उन्हें जेल की सजा या जुर्माने के बजाय 'अच्छे आचरण' की शर्त पर एक साल के लिए परिवीक्षा पर रिहा करने का आदेश दिया। कोर्ट के इस फैसले के तुरंत बाद अलका लांबा ने मीडिया से बात करते हुए साफ कर दिया कि वह अपनी दोषसिद्धि के खिलाफ ऊपरी अदालत का दरवाजा खटखटाएंगी।
यह पूरा विवाद जुलाई 2024 का है, जब महिला आरक्षण विधेयक के विरोध में जंतर-मंतर पर एक बड़ा प्रदर्शन हुआ था। इस प्रदर्शन के दौरान नियमों का उल्लंघन करने और सरकारी कर्मचारियों को उनकी ड्यूटी करने से रोकने के आरोप में दिल्ली के पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने में अलका लांबा के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। इस मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट ने 25 मई को ही अलका लांबा को दोषी करार दे दिया था, जिसके बाद सजा के प्रावधानों पर बहस के लिए 6 जून की तारीख तय की गई थी।
सुनवाई के दौरान अलका लांबा ने खुद एक आवेदन दायर कर अदालत से अच्छे आचरण के आधार पर परिवीक्षा पर रिहा करने की मांग की थी। उन्होंने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि उन्होंने अपने 30 साल के राजनीतिक जीवन में हमेशा संविधान और कानून का सम्मान किया है। अदालत ने उनकी दलील को स्वीकार करते हुए उन पर कोई जेल की सजा या आर्थिक जुर्माना नहीं लगाया, बल्कि 1 लाख रुपये का मुचलका जमा करने और एक साल तक अच्छा आचरण बनाए रखने की शर्त पर रिहाई दे दी।
अलका लांबा ने पत्रकारों से कहा: "मैंने पहले ही कहा था कि अदालत का जो भी फैसला होगा, मैं उसका स्वागत करूंगी। मुझे खुशी है कि कोर्ट ने माना कि मेरे 30 साल के राजनीतिक सफर में मैंने हमेशा कानून का पालन किया है। लेकिन चूंकि मुझे दोषी ठहराया गया है, इसलिए मैं इस फैसले को चुनौती दूंगी।" उनकी वकील आरफा खानम ने भी कहा कि हालांकि न्यायाधीश ने कोई जेल या जुर्माना नहीं लगाया है, लेकिन दोषसिद्धि को हटाने के लिए वे जल्द ही सत्र न्यायालय में अपील दायर करेंगी। ( इनपुट : ANI)
Updated on:
06 Jun 2026 07:08 pm
Published on:
06 Jun 2026 07:07 pm
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