
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में जारी सियासी संकट मंगलवार को नए मोड़ पर पहुंच गया। पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी ने लोकसभा में कल्याण बनर्जी को चीफ व्हिप नियुक्त कर इसका पत्र लोकसभा अध्यक्ष को भेज दिया। इससे एक दिन पहले बागी सांसदों ने काकोली घोष को अपना चीफ व्हिप चुनते हुए अलग बैठने की मांग की थी। हालांकि 20 सांसदों के बागी गुट के दावे पर अब तक लोकसभा की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इस बीच दोनों खेमों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी रहा।
कल्याण बनर्जी ने दावा किया कि सांसद युसूफ पठान ने उन्हें बताया था कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का फोन आया था। उन्होंने बागी सांसदों को 'जनादेश से विश्वासघात करने वाला' बताते हुए कहा कि उन्हें जनता और पार्टी कार्यकर्ताओं के सवालों का जवाब देना होगा। वहीं सांसद महुआ मोइत्रा ने भी युसूफ पठान पर निशाना साधा। दूसरी ओर काकोली घोष ने दोहराया कि 20 सांसद एनडीए को समर्थन देने के पक्ष में हैं और इस संबंध में पत्र भेजा जा चुका है।
पार्टी में जारी बगावत पर टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद ने कहा, 'हमारे 29 नेता ‘मां, माटी और मानुष’ के नाम पर चुनाव जीतकर सांसद बने हैं। मैं इन ‘गद्दारों’ से पूछना चाहता हूं कि अगर उन्हें कोई परेशानी थी, तो उन्होंने चुनाव से पहले क्यों नहीं उठाई? चुनाव के बाद ही मुद्दे क्यों सामने आए? सुखेंदु शेखर रॉय में कम से कम इतनी राजनीतिक नैतिकता थी कि उन्होंने इस्तीफा दे दिया। अगर आपमें भी राजनीतिक नैतिकता है, तो आप सब भी इस्तीफा दें और भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ें।'
राज्यसभा में टीएमसी की उपनेता सागरिका घोष ने फोन पर धमकी मिलने का आरोप लगाते हुए दिल्ली पुलिस से कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर कथित तौर पर संबंधित नाम और नंबर भी साझा किए। उधर, पार्टी में टूट की आशंकाओं के बीच ममता बनर्जी सांसदों को साथ बनाए रखने और लोकसभा-राज्यसभा में संगठनात्मक पकड़ मजबूत करने में जुटी हैं।
यहां आपको बता दें कि चीफ व्हिप किसी राजनीतिक दल का वरिष्ठ पदाधिकारी होता है, जिसकी जिम्मेदारी संसद या विधानसभा में पार्टी के सांसदों अथवा विधायकों के बीच समन्वय और अनुशासन बनाए रखना होती है। वह सदन में पार्टी की नीतियों और रणनीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करता है। यदि कोई सदस्य पार्टी के निर्देशों का पालन नहीं करता, तो उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।