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‘लोकतंत्र में ऐसा नहीं होना चाहिए’, डोला सेन-कीर्ति आजाद को समिति से हटाए जाने पर TMC का हमला

TMC Crisis: संसदीय स्थायी समितियों के पुनर्गठन में TMC की डोला सेन और कीर्ति आजाद से दो अहम समितियों की अध्यक्षता चली गई। पार्टी ने फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा- लोकतंत्र में ऐसा नहीं होना चाहिए।
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Oct 04, 2026
Mamata Banerjee
पश्चिम बंगाल की पूर्व सीएम ममता बनर्जी

TMC: संसदीय स्थायी समितियों के पुनर्गठन को लेकर तृणमूल कांग्रेस (TMC) और केंद्र के बीच सियासी टकराव बढ़ गया है। टीएमसी ने अपनी राज्यसभा सांसद डोला सेन और लोकसभा सांसद कीर्ति आजाद को दो अहम संसदीय समितियों की अध्यक्षता से हटाए जाने पर सवाल उठाए हैं। पार्टी नेता कुणाल घोष ने कहा कि संसदीय स्थायी समिति में जो हुआ, वह लोकतंत्र में नहीं होना चाहिए। शनिवार को राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विभागों से जुड़ी संसदीय स्थायी समितियों का पुनर्गठन किया। इसके बाद वाणिज्य संबंधी समिति की अध्यक्षता डोला सेन की जगह बीजेपी सांसद सुधांशु त्रिवेदी को दी गई, जबकि रसायन एवं उर्वरक संबंधी समिति की अध्यक्षता कीर्ति आजाद की जगह काकोली घोष दस्तीदार को मिली। काकोली टीएमसी के बागी धड़े से जुड़ी हैं।

डोला सेन बोलीं- हमें कोई हैरानी नहीं हुई


डोला सेन ने कहा कि उन्हें इस फैसले से कोई हैरानी नहीं हुई। उन्होंने दावा किया कि 2014 से 2019 के बीच विपक्षी दलों के नेताओं को संसदीय स्थायी समितियों की अध्यक्षता दी गई थी। उन्होंने कहा कि पहले सुदीप बंद्योपाध्याय और डेरेक ओ'ब्रायन को समितियों की अध्यक्षता मिली थी। डोला सेन ने आरोप लगाया कि बाद में टीएमसी नेतृत्व के साथ उनकी राजनीतिक नजदीकी के कारण दोनों नेताओं से अध्यक्षता छीन ली गई। डोला सेन ने यह भी कहा कि 2024 में बीजेपी लोकसभा में बहुमत के आंकड़े से नीचे रही और इसके बाद विपक्षी दलों को विभिन्न समितियों की अध्यक्षता दी गई। उनके मुताबिक, अब एक बार फिर टीएमसी से समितियों की अध्यक्षता वापस ले ली गई है।

कुणाल घोष बोले- लोकतंत्र में ऐसा नहीं होना चाहिए


टीएमसी नेता कुणाल घोष ने डोला सेन और कीर्ति आजाद को समितियों से हटाए जाने पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं को हटाकर उनकी जगह 'गलत लोगों' को समिति में लाया गया। टीएमसी की ओर से संसदीय समितियों के पुनर्गठन को लेकर यह विरोध ऐसे समय सामने आया है जब पार्टी के भीतर भी टूट और बगावत का विवाद चल रहा है। संसदीय समितियों के पुनर्गठन की खबरों के मुताबिक, काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में टीएमसी के कुछ सांसदों ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद अलग धड़े का दावा किया था। इस धड़े की स्थिति को लेकर लोकसभा अध्यक्ष के स्तर पर मामला लंबित है।

TMC ने दोनों अहम समितियों की अध्यक्षता गंवाई


नए बदलाव के बाद टीएमसी के हाथ से वाणिज्य और रसायन एवं उर्वरक से जुड़ी दोनों प्रमुख संसदीय समितियों की अध्यक्षता चली गई है। वाणिज्य समिति की कमान अब बीजेपी के सुधांशु त्रिवेदी के पास होगी, जबकि रसायन एवं उर्वरक समिति की अध्यक्षता काकोली घोष दस्तीदार करेंगी।

Updated on:
04 Oct 2026 03:19 pm
Published on:
04 Oct 2026 03:16 pm