
CJP Parliament March: तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने मंगलवार, 22 जुलाई को राज्यसभा में नियम 267 के तहत नोटिस देकर 20 जुलाई को दिल्ली में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर दिल्ली पुलिस की कथित कार्रवाई पर तुरंत चर्चा कराने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि छात्रों के लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस की ओर से की गई कार्रवाई गंभीर मामला है और इस पर संसद में तत्काल चर्चा होनी चाहिए। टीएमसी ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ जिस तरह का व्यवहार किया गया, वह लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
टीएमसी की ओर से दिए गए नोटिस में कहा गया है कि 20 जुलाई को CJP के प्रदर्शन में शामिल छात्रों पर दिल्ली पुलिस ने कथित तौर पर बल प्रयोग किया। पार्टी का कहना है कि यह केवल कानून व्यवस्था का मामला नहीं, बल्कि छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा मुद्दा है। इसलिए सरकार को संसद में इस पर जवाब देना चाहिए और पूरे घटनाक्रम पर विस्तृत चर्चा कराई जानी चाहिए। नियम 267 के तहत नोटिस का उद्देश्य सदन का सामान्य कामकाज रोककर किसी महत्वपूर्ण और तत्काल सार्वजनिक मुद्दे पर चर्चा कराना होता है।
टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने भी दिल्ली में छात्रों के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई की आलोचना की है। उन्होंने इसे अस्वीकार्य बताते हुए कहा कि युवाओं पर पुलिस की कार्रवाई लोकतांत्रिक व्यवस्था के अनुरूप नहीं है। उन्होंने दिल्ली में विपक्षी दलों के धरने को पार्टी का पूरा समर्थन देने की बात कही। विपक्ष के नेताओं ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए प्रदर्शन किया था। ममता बनर्जी ने कहा कि टीएमसी विपक्ष के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रहेगा।
ममता बनर्जी ने अपने हालिया संबोधन में यह भी कहा कि वह केंद्र सरकार के खिलाफ CJP के आंदोलन में शामिल होने के लिए नई दिल्ली जाएंगी। उन्होंने कहा कि छात्रों और युवाओं के मुद्दों पर उनकी पार्टी लगातार आवाज उठाती रहेगी। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के खिलाफ उनकी राजनीतिक लड़ाई जारी रहेगी और जरूरत पड़ने पर वह सर्वोच्च न्यायालय तक भी जाएंगी। टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने भी प्रदर्शन के दौरान विपक्षी नेताओं के साथ हुए व्यवहार की आलोचना करते हुए कहा कि संसदीय लोकतंत्र में विपक्ष एक महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्था है और जवाबदेही को डराने या दबाव बनाने के जरिए नहीं टाला जा सकता। टीएमसी का कहना है कि छात्रों के अधिकारों और लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार की रक्षा के लिए वह संसद से लेकर सड़क तक अपनी आवाज उठाती रहेगी।