
West Bengal Assembly Kunal Ghosh: पश्चिम बंगाल विधानसभा के बजट सत्र के दौरान उस वक्त ड्रामा देखने को मिला, जब ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (TMC) के विधायक कुणाल घोष को सदन की गरिमा भंग करने और कार्यवाही में बाधा डालने के आरोप में पुरे दिन के लिए सस्पेंड कर दिया गया। स्पीकर के आदेश के तुरंत बाद मार्शल कुणाल घोष को जबरदस्ती उठाकर सदन से बाहर ले गए।
गृह और पहाड़ी मामलों के बजट पर चर्चा के दौरान सदन में भारी हंगामा हुआ। TMC के बागी चीफ व्हिप अकरुज़्ज़मान सदन को संबोधित कर रहे थे, तभी विधायक कुणाल घोष अपनी सीट से उठे और बार-बार भाषण में बाधा डालने लगे। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि कुणाल घोष आक्रामक अंदाज में अकरुज़्ज़मान की ओर बढ़े और ठीक उनके सामने जाकर खड़े हो गए। इस दौरान धक्का-मुक्की जैसी स्थिति पैदा हो जाती है।
इस दौरान विधानसभा स्पीकर उन्हें बार-बार शांत होने और अपनी सीट पर लौटने का निर्देश देते हैं। जब उन्होंने बार-बार दी गई इन चेतावनियों को नजरअंदाज किया, तो स्पीकर ने उन्हें तुरंत सदन से बाहर निकालने का आदेश दिया।
स्पीकर का आदेश मिलते ही सदन में तैनात मार्शल हरकत में आ गए। जब कुणाल घोष ने अपनी मर्जी से बाहर जाने से इनकार कर दिया, तो सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें उठाया और सदन के मुख्य द्वार से बाहर ले गए। जिसके बाद राज्य मंत्री तापस रॉय ने विधानसभा में एक प्रस्ताव पेश किया जिसमें सुझाव दिया गया कि कुणाल घोष को उनके असंसदीय व्यवहार के कारण बाकी सत्र के लिए सस्पेंड कर दिया जाए।
शुभेन्दु अधिकारी ने इस घटना की निंदा की और कुणाल घोष के व्यवहार पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि कुणाल घोष न केवल कार्यवाही में बाधा डाल रहे थे, बल्कि वरिष्ठ विधायक और पूर्व मंत्री अखरुज्जमां के साथ शारीरिक दुर्व्यवहार करने पर भी उतारू थे। लोकतंत्र में ऐसी गुंडागर्दी के लिए कोई जगह नहीं है। मुख्यमंत्री ने कहा कि संसद या विधानसभा में विचारों का मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन किसी वरिष्ठ सदस्य के भाषण में बाधा डालना और आक्रामक व्यवहार करना स्वीकार्य नहीं है।