
TMC Rebel MPs Meet BJP Leaders in Delhi: पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर जारी संकट और गहरा होता दिखाई दे रहा है। एक ओर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी दिल्ली में इंडिया गठबंधन की अहम बैठक में शामिल होकर विपक्षी एकता की रणनीति पर चर्चा कर रही थीं, वहीं दूसरी ओर पार्टी के 10 बागी सांसदों की बीजेपी नेताओं के साथ बंद कमरे में बैठक ने सियासी हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है।
सूत्रों के मुताबिक, यह बैठक दिल्ली में बीजेपी के वरिष्ठ नेता भूपेंद्र यादव के आवास पर हुई। खास बात यह रही कि यह बैठक उस स्थान से करीब एक किलोमीटर की दूरी पर हुई, जहां ममता बनर्जी इंडिया ब्लॉक के नेताओं के साथ बातचीत कर रही थीं।
सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में टीएमसी के कई असंतुष्ट सांसद शामिल हुए। इनमें शताब्दी रॉय, काकोली घोष दस्तिदार, अबू ताहेर खान, खलीलुर रहमान, असीत कुमार माल, अरूप चक्रवर्ती, कालिपदा सोरेन, जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया, प्रसून बनर्जी और शर्मिला सरकार के नाम शामिल बताए जा रहे हैं।
इसके अलावा हाल ही में पार्टी छोड़ने वाले वरिष्ठ नेता सुखेंदु शेखर रॉय और विधायक अखरुज्जमान भी बैठक में मौजूद रहे। हालांकि बैठक में क्या चर्चा हुई, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद पार्टी के भीतर असंतोष लगातार बढ़ता नजर आ रहा है। सूत्रों का दावा है कि पार्टी के करीब 20 सांसद नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोलने की तैयारी में हैं और इस संबंध में एक पत्र भी तैयार किया जा रहा है।
बताया जा रहा है कि टीएमसी के कई सांसद पिछले कुछ समय से बीजेपी नेताओं के संपर्क में हैं। इससे पहले भी खबरें सामने आई थीं कि पार्टी के बड़ी संख्या में विधायक बागी गुट के साथ खड़े हैं।
इस घटनाक्रम ने इसलिए भी ध्यान खींचा क्योंकि ममता बनर्जी उसी समय दिल्ली में इंडिया गठबंधन की बैठक में हिस्सा ले रही थीं। विपक्षी एकता को मजबूत करने की कोशिशों के बीच उनकी अपनी पार्टी में बढ़ती नाराजगी ने राजनीतिक समीकरणों को जटिल बना दिया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि सांसदों का असंतोष खुलकर सामने आता है तो यह तृणमूल कांग्रेस के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है।
सूत्रों के मुताबिक, कुछ सांसदों की हालिया गतिविधियों ने भी पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है। बताया गया है कि एक वरिष्ठ सांसद ने मुंबई से कोलकाता लौटते समय अचानक दिल्ली में रुककर कुछ लोगों से मुलाकात की। वहीं एक अन्य सांसद का फोन लंबे समय तक बंद रहने की भी चर्चा है।
इन घटनाओं को पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष और संभावित राजनीतिक बदलाव के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, पार्टी के भीतर नाराजगी का असर नेताओं के व्यवहार में भी दिखाई दे रहा है। लंबे समय से ममता बनर्जी को 'दीदी' कहकर संबोधित करने वाले कुछ नेताओं ने हाल में उन्हें उनके नाम से संबोधित किया है। राजनीतिक जानकार इसे पार्टी के भीतर बदलते माहौल का संकेत मान रहे हैं।
बीजेपी की ओर से फिलहाल इस बैठक को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि पहले भी बीजेपी नेताओं ने तृणमूल कांग्रेस में चल रही उठापटक को उसका आंतरिक मामला बताया है।
दूसरी ओर, टीएमसी नेतृत्व लगातार पार्टी को एकजुट रखने की कोशिश कर रहा है और बागी नेताओं पर नजर बनाए हुए है।
पार्टी के भीतर पहले से चल रही बगावत और अब सांसदों की कथित गतिविधियों ने ममता बनर्जी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल उनकी सबसे बड़ी चुनौती पार्टी के सांसदों और नेताओं को एकजुट रखना है।
आने वाले दिनों में यह साफ हो सकेगा कि यह असंतोष केवल दबाव की राजनीति है या फिर तृणमूल कांग्रेस के भीतर किसी बड़े राजनीतिक बदलाव की भूमिका तैयार हो रही है। फिलहाल बंगाल की राजनीति में इस घटनाक्रम ने हलचल जरूर बढ़ा दी है।