Toddler: दिल्ली के एक पिता ने 5 घंटे की फ्लाइट में अपनी छोटी बच्ची के रोने की आशंका के चलते सह-यात्रियों से पहले ही माफी मांग ली। उनका यह शिष्टाचार भरा वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
Flight : क्या आपने कभी फ्लाइट (Flight) में सफर किया है और किसी छोटे बच्चे (Toddler) के रोने से परेशान हुए हैं? हाल ही में दिल्ली (Delhi) के एक पिता ने कुछ ऐसा किया, जिसने इंटरनेट (Internet) पर सबका ध्यान खींच लिया है। पांच घंटे की लंबी हवाई यात्रा (Air Travel) शुरू होने से पहले ही इस पिता ने अपनी सीट पर खड़े होकर एक खास घोषणा (Announcement) की। उन्होंने साथी यात्रियों (Passengers) से अपनी छोटी बच्ची के लिए पहले ही माफी मांग ली। पिता का कहना था कि बच्ची सफर के दौरान चिड़चिड़ी (Cranky) हो सकती है, इसलिए वे सभी से थोड़ा संयम बरतने की अपील (Appeal) कर रहे हैं। इस अनोखे और प्यारे व्यवहार का वीडियो सोशल मीडिया (Social Media) पर तेजी से वायरल (Viral) हो रहा है।
सोशल मीडिया पर इस वीडियो को देख कर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। डॉ. रोहित चौधरी नाम के यूजर ने इसे इंस्टाग्राम पर शेयर किया था। कई लोगों ने इस पिता की समझदारी और शिष्टाचार की जम कर तारीफ की है। उनका मानना है कि इस तरह की बातचीत से फ्लाइट में माहौल अच्छा और शांत रहता है। वहीं, कुछ लोगों का यह भी कहना था कि ऐसी घोषणा की कोई जरूरत नहीं थी, क्योंकि छोटे बच्चों का रोना एक बिल्कुल सामान्य बात है और इसके लिए किसी को सफाई देने की कोई आवश्यकता नहीं होनी चाहिए।
वीडियो वायरल होने के बाद, इंटरनेट पर बच्चों के साथ यात्रा करने के शिष्टाचार को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है। कई माता-पिता अब अपने निजी अनुभव भी शेयर कर रहे हैं। खबर लिखे जाने तक इस वीडियो को लाखों बार देखा जा चुका है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मूल यूजर से और अधिक जानकारी के लिए संपर्क किया गया है, ताकि यह पता चल सके कि यात्रा के दौरान वास्तव में बच्ची का व्यवहार कैसा रहा और सह-यात्रियों ने उनके साथ कैसा बर्ताव किया।
इस घटना का एक दूसरा पहलू यह भी है कि सार्वजनिक स्थानों पर हम एक-दूसरे के प्रति कितने सहनशील हैं। जब हम किसी बच्चे को पब्लिक में रोते हुए देखते हैं, तो अक्सर माता-पिता को हीन भावना या गुस्से से देखा जाता है। इस पिता ने उसी सामाजिक दबाव को कम करने के लिए यह पहले ही कदम उठा लिया। यह वीडियो हमें सोचने पर मजबूर करता है कि क्या समाज के रूप में हमें छोटे बच्चों वाले माता-पिता के प्रति अधिक सहानुभूति नहीं रखनी चाहिए?