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Bunty Aur Babli फिल्म देख कर 16 लाख की ज्वेलरी चोरी: AI ने छीनी नौकरी, दो दोस्त बने रियल लाइफ चोर!

Bunty Aur Babli: हिंदी सिनेमा की चर्चित फिल्म 'बंटी और बबली' देख कर 18 साल के दो दोस्तों ने 16 लाख के गहने चुराए, लड़के की नौकरी AI ने छीनी। पुलिस ने दोनों को पकड़ा, सारा माल बरामद; गरीबी और बेरोजगारी ने धकेला गलत रास्ते पर।

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Dec 26, 2025
फिल्म 'बंटी और बबली' में ​अभिषेक बच्चन और रानी मुखर्जी और फिल्म देख कर चोरी करने वाले असली बंटी और बबली। ( फोटो डिजाइन: पत्रिका)

Bunty Aur Babli: बॉलीवुड की मशहूर फिल्म 'बंटी और बबली' (Bunty Aur Babli) को देख कर दो युवाओं ने चोरी कर ली। 18 साल के दो युवा बचपन से दोस्त हैं, उन्होंने एक ज्वेलरी दुकान से करीब 16 लाख रुपये के गहने चुरा लिए। लड़का ग्राफिक डिजाइनर था और लड़की डॉक्टर बनने के लिए नीट की परीक्षा की तैयारी कर रही थी। दोनों गरीब परिवार से आते हैं और आर्थिक तंगी ने उन्हें यह कदम उठाने पर मजबूर कर दिया। यह चोरी 22 दिसंबर की रात को इंदौर के राऊ इलाके में स्थित 'श्री ज्वेलर्स' नाम की दुकान (Indore Theft) से हुई। आरोपियों प्रियांशु-अंजना ने सोने, चांदी और हीरे के गहने चुराए, जिनकी कुल कीमत लगभग 16.17 लाख रुपये बताई जा रही है। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी जांच की मदद से दोनों को भोपाल से पकड़ा। हैरानी की बात यह है कि चोरी का सारा सामान पुलिस ने बरामद कर लिया। दोनों ने स्वीकार किया कि वे 2005 की फिल्म 'बंटी और बबली' देख कर इतने प्रभावित हुए कि चोरी की पूरी योजना उसी से कॉपी की। फिल्म में अभिषेक बच्चन और रानी मुखर्जी ठगी कर के अमीर बनते हैं, ठीक वैसे ही इन युवाओं ने भी सोचा कि एक चोरी से जीवन बदल जाएगा।

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किराया और खाने-पीने का खर्च चलाना मुश्किल हो गया

लड़के ने पुलिस को बताया कि कुछ महीने पहले उसकी ग्राफिक डिजाइनिंग की नौकरी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की वजह से चली गई। कंपनी में छंटनी हुई और AI टूल्स ने उसका काम संभाल लिया। इसके बाद किराया और खाने-पीने का खर्च चलाना मुश्किल हो गया (AI Job Loss)। उसकी दोस्त नीट की कोचिंग कर रही थी, लेकिन दोनों साथ रहते थे। आर्थिक परेशानी ने उन्हें गलत रास्ते पर धकेल दिया। चोरी के बाद वे गहने बेचने की कोशिश करते रहे, लेकिन लोग उन्हें छोटी उम्र का समझ कर सही दाम नहीं दे रहे थे। आखिरकार उन्होंने क्रिस्मस की छुट्टियां मनाने का प्लान बनाया और इंदौर से बाहर चले गए, लेकिन पुलिस की नजर उन पर थी।

जांच चल रही है कि कहीं वे पहले कोई अपराध तो नहीं कर चुके

पुलिस उपायुक्त श्रीकृष्ण लालचंदानी ने बताया कि दोनों ने फिल्म से प्रेरणा लेने की बात खुद स्वीकार की है। वे कोई प्रोफेशनल चोर नहीं थे, बल्कि आम युवा थे जो सपने देखते थे। अब जांच चल रही है कि कहीं वे पहले भी कोई छोटा-मोटा अपराध तो नहीं कर चुके। यह मामला सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।

लोगों का रिएक्शन: हैरानी से लेकर गुस्सा तक

सोशल मीडिया पर इस खबर को देखकर लोग चौंक गए हैं। कई यूजर्स बोले, "फिल्में तो मनोरंजन के लिए होती हैं, लेकिन यह तो हद हो गई! बॉलीवुड की फिल्में अब अपराध सिखा रही हैं?" कुछ यूजर्स ने मजाक उड़ाया कि "अब बंटी और बबली का सीक्वल रियल लाइफ में आ गया।" वहीं, गंभीर यूजर्स ने AI की वजह से नौकरी जाने पर चिंता जताई। एक यूजर ने लिखा, "AI कितना आगे बढ़ रहा है, लेकिन युवाओं की नौकरियां छिन रही हैं। सरकार को स्किल डवलपमेंट पर ध्यान देना चाहिए।" कई लोगों ने युवाओं पर तरस खाया कि गरीबी और बेरोजगारी ने उन्हें अपराध की राह पर ला दिया। कुछ यूजर्स ने पुलिस की तारीफ की कि इतनी जल्दी केस सॉल्व कर लिया। कुल मिलाकर, यह खबर ट्रेंडिंग हो रही है और लोग फिल्मों के असर पर बहस कर रहे हैं।

अब आगे क्या होगा ?

पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया है और कोर्ट में पेश किया जाएगा। चोरी का सामान बरामद हो गया है, इसलिए दुकान मालिक को राहत मिली। लेकिन यह मामला युवाओं की बेरोजगारी और फिल्मों के नकारात्मक प्रभाव पर बड़ा सवाल उठा रहा है। क्या AI से प्रभावित युवाओं के लिए नई ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू होंगे? क्या बॉलीवुड को ऐसी फिल्में बनाते समय सावधानी बरतनी चाहिए? आगे की जांच में और खुलासे हो सकते हैं।

AI, बेरोजगारी और फिल्मों का असर

यह घटना सिर्फ एक चोरी नहीं, बल्कि आज के समय की कई समस्याएं उजागर करती है। AI तेजी से नौकरियां छीन रहा है, खासकर क्रिएटिव फील्ड में ऐसा हो रहा है। ग्राफिक डिजाइन जैसे काम अब AI टूल्स आसानी से कर लेते हैं। दूसरी तरफ, नीट जैसी परीक्षाओं की तैयारी में लाखों रुपये खर्च होते हैं, लेकिन सफलता की कोई गारंटी नहीं है। गरीब परिवार के युवा सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। साथ ही, फिल्में युवाओं पर गहरा असर डालती हैं। 'बंटी और बबली' जैसी कॉमेडी फिल्में मजेदार लगती हैं, लेकिन गलत हाथों में गलत संदेश दे सकती हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि माता-पिता और स्कूलों को बच्चों को सही-गलत समझाना चाहिए। यह घटना एक सबक है कि सपने पूरे करने के लिए मेहनत का रास्ता चुनें, शॉर्टकट नहीं।

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