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राज्यसभा में राघव चड्ढा ने उठाया ‘कट मनी’ का मुद्दा, बोले- रेफरल कमीशन का बोझ मरीजों पर पड़ता है

Raghav Chadha Big Statement: राज्यसभा में भाजपा सांसद राघव चड्ढा ने डॉक्टरों और कुछ डायग्नोस्टिक सेंटरों के बीच कथित रेफरल कमीशन या 'कट मनी' व्यवस्था का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस व्यवस्था का आर्थिक बोझ मरीजों पर पड़ता है, जिससे मेडिकल जांच का खर्च 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ सकता है।
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भारत

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Harshul Mehra

Aug 06, 2026

raghav chadha doctor referral commission cut money diagnostic centres

राघव चड्ढा का बड़ा बयान। फोटो सोर्स-IANS

Raghav Chadha Big Statement: राज्यसभा में गुरुवार को भाजपा सांसद राघव चड्ढा ने डॉक्टरों और कुछ डायग्नोस्टिक सेंटरों के बीच कथित 'कट मनी' या रेफरल कमीशन की व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता जताई। शून्यकाल के दौरान उन्होंने कहा कि इस तरह की व्यवस्था का आर्थिक बोझ अंततः मरीजों पर पड़ता है और इससे इलाज का खर्च बढ़ जाता है।

'रेफरल के बदले तय कमीशन मिलता है'

सदन में बोलते हुए राघव चड्ढा ने कहा कि कुछ डॉक्टरों और डायग्नोस्टिक सेंटरों के बीच एक अनौपचारिक व्यवस्था विकसित हो गई है, जिसके तहत मरीजों को जांच के लिए भेजने पर डॉक्टरों को तय कमीशन मिलता है। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था एक समानांतर प्रोत्साहन तंत्र की तरह काम करती है, जिसमें रेफरल के लिए निश्चित कमीशन और एजेंट तक मौजूद होते हैं।

'मार्केटिंग खर्च' और 'रेफरल कमीशन' के नाम पर होती है एंट्री

राघव चड्ढा ने कहा कि डायग्नोस्टिक सेंटर अपने खातों में इस भुगतान को 'मार्केटिंग एक्सपेंस' के रूप में दर्ज करते हैं, जबकि डॉक्टर इसे 'रेफरल कमीशन' बताते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरी राशि का बोझ अंततः मरीज के बिल में जोड़ दिया जाता है।

'15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ सकता है खर्च'

राज्यसभा सांसद ने कहा कि इस व्यवस्था की वजह से मरीजों का मेडिकल खर्च 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि इससे जरूरत से ज्यादा मेडिकल जांच और अनावश्यक रेफरल को बढ़ावा मिलता है। उन्होंने मरीजों से अपील की कि मेडिकल टेस्ट कराने से पहले ऐसे संकेतों के प्रति सतर्क रहें।

सोशल मीडिया पर भी साझा किया भाषण

संसद में दिए गए अपने भाषण का वीडियो राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भी साझा किया। उन्होंने लिखा कि कुछ डॉक्टरों और डायग्नोस्टिक सेंटरों के बीच 'कट मनी' की व्यवस्था मरीजों के इलाज से ज्यादा इस बात पर आधारित होती है कि मरीज को किसने रेफर किया। उन्होंने लोगों से अगली बार मेडिकल टेस्ट कराने से पहले इस विषय पर ध्यान देने की अपील की।

मेडिकल नियम क्या कहते हैं?

रिपोर्ट के अनुसार, मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया और वर्तमान नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के नियम डॉक्टरों द्वारा रेफरल कमीशन या फीस साझा करने जैसी प्रथाओं पर रोक लगाते हैं। ऐसे मामलों में निलंबन जैसी कार्रवाई का भी प्रावधान है।

सख्त निगरानी की जरूरत पर जोर

राघव चड्ढा के इस मुद्दे को उठाने के बाद एक बार फिर स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता और मरीजों को अनावश्यक आर्थिक बोझ से बचाने के लिए नियमों के प्रभावी पालन की आवश्यकता पर चर्चा तेज हो गई है।