
शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने मुंबई में अपनी पार्टी की दशहरा रैली (Dussehra Rally) के दौरान युवाओं के आंदोलन का समर्थन करते हुए यह बयान दिया है। उन्होंने कहा कि "सड़कों पर उतरे युवा नक्सली नहीं हैं, बल्कि वे अपने अधिकारों की मांग करने वाले क्रांतिकारी हैं। ठाकरे के इस बयान को मौजूदा राजनीतिक माहौल में अहम माना जा रहा है।
उद्धव ठाकरे ने जोर देकर कहा कि विरोध प्रदर्शन करना देश के युवाओं का अधिकार है। उन्होंने वर्तमान राजनीतिक स्थिति पर कटाक्ष करते हुए कहा कि आज हर किसी के साथ, विशेषकर नए मतदाताओं के साथ 'वोट की चोरी' हो रही है। उन्होंने अपनी रैली में स्पष्ट किया कि वे और उनकी पार्टी देश में एक बड़ा 'सत्ता परिवर्तन' (Regime Change) लाने के लिए खड़े हैं और इसके खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं।
शिवसेना (UBT) प्रमुख ने कहा कि 'भगवा' उनकी मुख्य पहचान है और उनकी इस राजनीतिक व सांस्कृतिक पहचान को कोई भी उनसे नहीं छीन सकता। उन्होंने आगे कहा कि उनका लक्ष्य केवल महाराष्ट्र विधानसभा ही नहीं, बल्कि लाल किले पर भी भगवा फहराना है।
उन्होंने आगे कहा कि उनका लक्ष्य केवल महाराष्ट्र विधानसभा ही नहीं, बल्कि लाल किले पर भी भगवा फहराना है। रैली में मौजूद कार्यकर्ताओं ने उनके इस बयान का तालियों के साथ स्वागत किया।
ठाकरे का यह बयान पिछले कुछ महीनों से देश के विभिन्न हिस्सों में परीक्षाओं में अनियमितताओं और अन्य मुद्दों को लेकर युवाओं और छात्रों द्वारा किए जा रहे प्रदर्शनों के संदर्भ में आया है। वे इन प्रदर्शनों का लगातार समर्थन करते रहे हैं। दशहरा रैली के मंच से एक बार फिर उन्होंने युवाओं के साथ खड़े होने का संदेश दिया।
गौरतलब है कि शिवसेना की दशहरा रैली पार्टी के लिए परंपरागत रूप से बेहद अहम आयोजन मानी जाती है, जहां पार्टी प्रमुख अपनी राजनीतिक दिशा और रणनीति का संकेत देते हैं। इस बार भी ठाकरे ने रैली के जरिए युवाओं, नए मतदाताओं और अपनी भगवा पहचान को केंद्र में रखकर विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों को स्पष्ट संदेश देने की कोशिश की।