UGC Regulations 2026: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने यूजीसी (UGC) के नए बिल और विदेशी विश्वविद्यालयों को भारत में कैंपस खोलने की अनुमति देने वाली गाइडलाइंस पर चिंता जताई है।
UGC Regulations 2026: यूजीसी की नई इक्विटी रेगुलेशंस 2026 को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। मोदी सरकार की सहयोगी जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए चेतावनी जारी की है। पार्टी प्रवक्ता और विधान परिषद सदस्य नीरज कुमार ने कहा कि समाज के किसी भी तबके में उपेक्षा या नाराजगी का भाव लोकतंत्र के लिए शुभ नहीं है। यह बयान ऐसे समय आया है जब नियमों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है, और बीजेपी में भी आंतरिक विरोध देखा जा रहा है।
UGC Equity Regulations 2026 इसी महीने लागू हुए हैं। इनमें OBC वर्ग को जातिगत भेदभाव की परिभाषा में शामिल किया गया है, लेकिन झूठी या दुर्भावनापूर्ण शिकायतों पर जुर्माना या निलंबन जैसे प्रावधान हटा दिए गए हैं। सामान्य वर्ग का आरोप है कि इससे कानून का दुरुपयोग हो सकता है, और गलत शिकायत दर्ज करने वाले को कोई दंड नहीं मिलेगा। इससे सामान्य श्रेणी के छात्रों और शिक्षकों को निशाना बनाया जा सकता है। नियमों के विरोध में बीजेपी के कई पदाधिकारियों ने इस्तीफा दे दिया है, और यूपी में सियासी पारा चढ़ गया है।
विवाद बढ़ने पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि जाति आधारित भेदभाव की परिभाषा गैर-समावेशी है, और संस्थागत सुरक्षा से कुछ श्रेणियों को बाहर कर दिया गया है। याचिका में मांग की गई है कि नियमों को मौजूदा स्वरूप में लागू करने से रोका जाए, और जाति-आधारित भेदभाव को 'जाति-तटस्थ और संविधान अनुरूप' तरीके से फिर से परिभाषित किया जाए। इसमें कहा गया है, "जाति के आधार पर भेदभाव का शिकार होने वाले सभी लोगों को सुरक्षा मिलनी चाहिए, चाहे उनकी जाति कुछ भी हो।" केंद्र सरकार और UGC को अंतरिम निर्देश देने की अपील की गई है, ताकि 'समान अवसर केंद्र' और 'समानता हेल्पलाइन' बिना भेदभाव के उपलब्ध हों।
JDU प्रवक्ता नीरज कुमार ने बयान में कहा, 'डॉ. भीमराव आंबेडकर ने संविधान बनाया, जिसमें सबको अपनी बात कहने का अधिकार है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार न्याय के साथ सबका विकास और सम्मान के रोल मॉडल हैं।' उन्होंने जोर दिया कि UGC के नए रेगुलेशन पर तरह-तरह की टिप्पणियां हो रही हैं, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट का फैसला सबके लिए महत्वपूर्ण होगा। यह बयान NDA गठबंधन में दरार की आशंकाओं को बढ़ा सकता है, क्योंकि JDU मोदी सरकार की प्रमुख सहयोगी है।
यह विवाद 2026 में UGC नियमों को लागू करने के बाद पहला बड़ा सियासी मुद्दा बन गया है। जीतन राम मांझी की पार्टी ने भी फंडामेंटल राइट्स का हवाला देते हुए विरोध जताया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सामान्य वर्ग की नाराजगी को भुनाने का प्रयास हो सकता है, जो आगामी चुनावों में असर डालेगा। JDU की चेतावनी से NDA में तनाव बढ़ सकता है, और सुप्रीम कोर्ट का फैसला इसकी दिशा तय करेगा।