Giriraj Singh Statement on UGC Rules: UGC नियमों को लेकर विरोध बढ़ रहा है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इन नियमों पर रोक लगा दी है। कोर्ट के इस फैसले को केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने 'सनातन की जीत' बताया है। साथ ही, प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री अमित शाह को धन्यवाद दिया।
UGC Rules Supreme Court Stay: देश में नए यूजीसी नियमों को लेकर विवाद नहीं थम रहा है। इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए समानता नियमों पर रोक लगा दी है। कोर्ट के इस फैसले के बाद देश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।
हालांकि, यूजीसी के इन नए नियमों को जातिगत भेदभाव को रोकने के लिए लाया गया था, लेकिन इन पर कई वर्गों ने विरोध प्रदर्शन किया और एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया।
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने इन नियमों को 'सनातन को बांटने वाला' बताया और सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद आभार व्यक्त किया। उन्होंने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का आभार भी जताया।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यूजीसी के नए नियम सनातन धर्म और सामाजिक एकता को तोड़ने वाले थे।
गिरिराज सिंह ने सोशल मीडिया पर शेयर किए एक पोस्ट में अदालत के फैसले का स्वागत किया। साथ ही, सिंह ने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को धन्यवाद देते हुए कहा कि मौजूदा सरकार 'सबका साथ, सबका विकास' की परंपरा के साथ आगे बढ़ती है।
उन्होंने कहा कि सरकार सनातन की अखंडता को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
नए नियमों पर विरोध याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इन पर फिलहाल रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहा कि इन नियमों में पूर्ण रूप से स्पष्टता नहीं है और पहली नजर में कुछ कमियां नजर आती हैं।
साथ ही, कोर्ट ने आशंका जताई कि यूजीसी नए नियमों का दुरुपयोग किया जा सकता है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने नए नियमों पर एक बड़ी मौखिक टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि अगर समय रहते कोई फैसला नहीं लिया तो इससे समाज में विभाजन का खतरा पैदा हो सकता है।
इसके अतिरिक्त, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और यूजीसी कमेटी को एक नोटिस जारी किया है और नियमों पर जवाब मांगा है। साथ ही, कोर्ट ने सुझाव दिया है कि इन नियमों की समीक्षा के लिए विशेषज्ञों की एक समिति बनाना आवश्यक है।
बता दें कि यूजीसी के ये नए नियम एससी, एसटी और ओबीसी छात्रों के साथ होने वाले जातिगत भेदभाव को रोकने के लिए लाए गए थे। इसमें कमेटी बनाने और शिकायतों पर कार्रवाई करने का भी प्रावधान था।
हालांकि, इन नए नियमों का गलत उपयोग होने की आशंका को जाहिर करते हुए सवर्ण वर्ग और छात्र संगठनों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।