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ईरान युद्ध पर भारत सरकार की चुप्पी पर शशि थरूर का बड़ा बयान – ‘सरेंडर नहीं, ज़िम्मेदार शासन’

ईरान युद्ध पर भारत सरकार की चुप्पी पर जहाँ कांग्रेस जमकर निशाना साध रही है, वहीं शशि थरूर ने इसका समर्थन किया है। क्या कहा थरूर ने? आइए नज़र डालते हैं।

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भारत

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Tanay Mishra

Mar 19, 2026

Shashi Tharoor

Shashi Tharoor (Photo - ANI)

ईरान-अमेरिका इज़रायल युद्ध (Iran-US Israel War) की वजह से मिडिल ईस्ट में तबाही मच चुकी है और जान-माल का काफी नुकसान हुआ है। इस युद्ध की वजह से ईरान को ज़्यादा नुकसान हुआ है, जहाँ 2,000 से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और देश के कई बड़े सैन्य ठिकानों, मंत्रालयों और तेल-गैस ठिकानों को भी निशाना बनाया गया है। भारत सरकार (Indian Government) ने अभी तक ईरान युद्ध का खुलकर विरोध नहीं किया है। ऐसे में सोनिया गांधी (Sonia Gandhi), राहुल गांधी (Rahul Gandhi) समेत कई कांग्रेस (Congress) नेता जमकर सरकार पर निशाना साध रहे हैं। इसी बीच अब कांग्रेस के एक सांसद ने सरकार के समर्थन किया है।

"सरेंडर नहीं, ज़िम्मेदार शासन"

भारत सरकार की चुप्पी को राहुल सरेंडर करार कर चुके हैं। अब तिरुवनंतपुरम (Thiruvananthapuram) से कांग्रेस के सांसद शशि थरूर (Shashi Tharoor) ने इस मामले में बड़ा बयान दिया है। थरूर ने भारत सरकार का समर्थन करते हुए उनके कूटनीतिक संयम का समर्थन किया है और उन आलोचकों को जवाब दिया है जिन्होंने ईरान के खिलाफ अमेरिका-इज़रायल युद्ध को लेकर सरकार की चुप्पी को 'नैतिक विफलता' बताया था थरूर ने कहा कि भारत सरकार का ईरान युद्ध के प्रति रुख सरेंडर नहीं, बल्कि ज़िम्मेदार शासन है।

क्या होनी चाहिए प्राथमिकता?

थरूर ने आगे कहा, "भले ही यह युद्ध अंतर्राष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करता हो, लेकिन भारत की विदेश नीति को सिद्धांतों और व्यावहारिकता के बीच संतुलन बनाना चाहिए। इसमें केवल बयानबाजी से निंदा करने के बजाय, राष्ट्रीय हित, क्षेत्रीय स्थिरता और रणनीतिक साझेदारियों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।"

खुद पर नहीं साधना चाहिए निशाना

थरूर ने कहा, "पिछले कुछ हफ्तों में कई भारतीय उदारवादियों ने अपना गुस्सा अपने ही लोगों पर निकाला है। भारत सरकार की चुप्पी को नैतिक कायरता बताया जा रहा है। अमेरिकी मुहावरे में कहें तो, यह एक 'सर्कुलर फायरिंग स्क्वाड' (आपस में ही एक-दूसरे पर गोली चलाना) जैसा बन गया है। यानी हम खुद पर ही निशाना साध रहे हैं। वो चाहते हैं कि हम सभी यह मांग करें कि भारत सरकार इस युद्ध को अंतर्राष्ट्रीय कानून का घोर उल्लंघन बताते हुए इसकी कड़ी निंदा करे, लेकिन हमें ऐसा करने की कोई ज़रूरत नहीं है।"