
Umar Khalid Book: दिल्ली में जेल में बंद उमर खालिद की मां सबीहा खानम ने बेटे की किताब प्रकाशित होने पर उम्मीद जताई है कि अब उसके विचार और लेखन ज्यादा लोगों तक पहुंचेंगे। उन्होंने कहा कि उमर खुद जेल में हैं लेकिन उनकी किताब और उनके शब्द लोगों तक पहुंच सकते हैं। सबीहा खानम ने कहा कि उमर की थीसिस का किताब के रूप में प्रकाशित होना अच्छी बात है। उनके मुताबिक, इससे लोग उमर को बेहतर तरीके से समझ सकेंगे और उनके काम के बारे में जान पाएंगे।
उन्होंने कहा, ''वह खुद जेल में है, लेकिन हम सभी उसके शब्द और लेख पढ़ सकते हैं। ये दूर-दूर तक पहुंच सकते हैं। सबीहा ने उम्मीद जताई कि लोग उमर के काम को समझेंगे और उसकी सराहना भी करेंगे।''
उमर खालिद के कुछ साथियों, (जिनमें कन्हैया कुमार का भी जिक्र किया गया) के अब उनके बारे में बात नहीं करने को लेकर जब सबीहा से सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उन्हें इससे निराशा नहीं है।
सबीहा खानम ने कहा, “जब आपकी उम्मीदें बहुत ज्यादा हों तभी निराशा होती है। मुझे शुरुआत से कोई उम्मीद नहीं थी।” उन्होंने साफ किया कि इसलिए साथियों के चुप रहने से उन्हें निराशा महसूस नहीं होती।
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में सोमवार को उमर खालिद की किताब 'फ्रैक्चर्ड कम्युनिटीज: आदिवासी हिस्ट्रीज़ एंड द पॉलिटिक्स ऑफ पावर' (Fractured Communities: Adivasi Histories and the Politics of Power) पर चर्चा हुई। कार्यक्रम का आयोजन JNU छात्रसंघ (JNUSU) ने किया था। इसमें कई छात्र और शिक्षक शामिल हुए।
यह चर्चा विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर रखी गई थी। किताब आदिवासी इतिहास, समुदाय और सत्ता के बीच संबंधों जैसे विषयों पर केंद्रित है। यह उमर खालिद की पीएचडी थीसिस पर आधारित है।
कार्यक्रम पहले JNU के स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज-1 (SSS-1) के ऑडिटोरियम में होना था। हालांकि, कार्यक्रम से पहले विश्वविद्यालय प्रशासन ने ऑडिटोरियम की बुकिंग रद्द कर दी। प्रशासन का कहना था कि कार्यक्रम से जुड़ी पूरी जानकारी पहले नहीं दी गई थी। इसके बाद JNUSU ने कार्यक्रम रद्द नहीं किया। छात्रसंघ ने स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज-2 (SSS-2) भवन के बाहर वैकल्पिक जगह पर चर्चा शुरू की। कार्यक्रम तय समय के अनुसार दोपहर करीब 3 बजे शुरू हुआ।
चर्चा शुरू होने के कुछ देर बाद ABVP के सदस्य वहां पहुंचे और नारेबाजी शुरू कर दी। इसके बाद दोनों पक्षों की तरफ से नारे लगाए गए। विरोध के कारण वक्ताओं के भाषण भी कई बार बाधित हुए। कार्यक्रम में इतिहासकार प्रभु महापात्र और उमा चक्रवर्ती, लेखक शुद्धब्रत सेनगुप्ता और सामाजिक कार्यकर्ता हर्ष मंदर समेत कई लोग शामिल हुए। सुरक्षा कर्मियों ने मौके पर स्थिति संभालने की कोशिश की।