वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट के दिन पहनी साड़ी पर हो रही टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हर साल उनकी साड़ी पर लोगों की नजर रहती है। ऐसी टिप्पणियाँ दुर्भावना से नहीं, बल्कि समाज में मौजूद पुरानी धारणाओं और रोजमर्रा की सोच के कारण निकल आती हैं।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट के दिन जो साड़ी पहनी थी, वह काफी चर्चा में है। लोग उसे लेकर तरह-तरह के कयास लगा रहे हैं। वित्त मंत्री ने बजट के दिन अपने पहनावे को लेकर होने वाली जांच-पड़ताल पर प्रतिक्रिया दी।
उन्होंने कहा कि हर साल जब वह यूनियन बजट पेश करती हैं, तो उनकी साड़ी पर कुछ लोगों की निगाह टिकी होती है। उस पर लोग कमेंट भी करते हैं।
सीतारमण ने कहा कि ऐसी बातें या कमेंट्स आमतौर पर दुश्मनी या गलत मंशा से नहीं किए जाते। ये सिर्फ वही पुरानी सोच और धारणाएं दिखाते हैं जो रोज की बातचीत में लोगों के मुंह से अक्सर निकल जाती हैं।
वित्त मंत्री ने कहा कि हम जानबूझकर ऐसा नहीं सोचते और न ही इसे बढ़ावा देते हैं, लेकिन यह सोच हमारे अंदर कहीं न कहीं मौजूद है और रोजमर्रा की बातचीत में अपने आप निकल आती है। जैसे कि कोई कहे – 'वह कौन से कपड़े पहन रही है?' या 'वह क्या कर रही है?' ये सवाल दिखाते हैं कि समाज में महिलाओं को अक्सर उनकी पोशाक या व्यवहार के आधार पर जज किया जाता है।
सीतारमण ने कहा कि आज भी कुछ लोग समाज में महिलाओं के विचारों, योग्यता और व्यक्तित्व के आधार पर जज नहीं करते। वित्त मंत्री ने कहा कि उन्हें अक्सर ऐसी टिप्पणियों को सीधे चुनौती देने का मन करता है।
वित्त मंत्री ने कहा- कपड़ों पर निगाह रखने वालों को मैं कह सकती हूं कि इस तरह से नहीं करना चाहिए। एक महिला के तौर पर, हम कभी किसी आदमी को देखकर यह नहीं कहेंगे कि उसे यह इस तरह से नहीं करना चाहिए। हम ऐसा बिल्कुल नहीं करेंगे।
सीतारमण ने आगे कहा कि मुझे नहीं लगता कि ऐसी टिप्पणियां आमतौर पर बुरे इरादे से की जाती हैं, लेकिन छिपे हुए पूर्वाग्रह कभी-कभी सामने आ जाते हैं। मैं अपना अनुभव शेयर करूंगी। हर साल, यह मेरे आसपास एक चर्चा का विषय बन जाता है, लोग पूछते हैं, 'आप बजट के दिन क्या पहनने वाली हैं?
वित्त मंत्री की ये टिप्पणियां यूनियन बजट भाषण के बाद आईं हैं, जो 124 मिनट तक चला और आने वाले वित्तीय वर्ष के लिए सरकार की आर्थिक प्राथमिकताओं को सामने रखा।
अपने लगातार नौवें बजट भाषण में सीतारमण ने पूंजीगत खर्च में बड़ी बढ़ोतरी की घोषणा की। इसे वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 12.2 लाख करोड़ रुपये तय किया। उन्होंने सकल घरेलू उत्पाद के 4.3 प्रतिशत के राजकोषीय घाटे का भी अनुमान लगाया।
हालांकि, टैक्सेशन के मामले में बजट ने व्यक्तिगत आयकरदाताओं को तुरंत कोई खास राहत नहीं दी। टैक्स छूट या स्टैंडर्ड डिडक्शन में बदलाव की उम्मीद करने वालों को प्रस्तावों में ऐसा कुछ नहीं मिला। इसके बजाय, टैक्सपेयर्स 1 अप्रैल से नए आयकर अधिनियम में चले जाएंगे।