
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण केंद्र सरकार के तीसरे कार्यकाल का तीसरा और अपना लगातार नौवां केंद्रीय बजट पेश कर रही हैं। बजट 2026-27 में सरकार ने किसनों पर भी विशेष जोर दिया है।
सरकार ने तटीय इलाकों के किसानों को उच्च मूल्य वाली फसलों की ओर प्रोत्साहित करने का ऐलान किया है। इसके तहत नारियल, काजू और कोको जैसी फसलों के साथ-साथ पहाड़ी और अन्य क्षेत्रों में अखरोट और पाइन नट्स जैसी मेवों की खेती को बढ़ावा दिया जाएगा।
सरकार का मानना है कि इससे किसानों की आमदनी बढ़ेगी और खेती अधिक लाभकारी बनेगी। वित्त मंत्री ने कहा कि चंदन भारत की सामाजिक और सांस्कृतिक विरासत से गहराई से जुड़ा हुआ है और घोषणा की कि केंद्र भारतीय चंदन पारिस्थितिकी तंत्र को पुनर्जीवित करने के लिए लक्षित खेती और फसल कटाई के बाद प्रसंस्करण को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकारों के साथ साझेदारी करेगा।
पशुपालन क्षेत्र में, सीतारमण ने कहा कि क्रेडिट-लिंक्ड सब्सिडी कार्यक्रम के माध्यम से ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण रोजगार सृजित करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
सरकार पशुधन उद्यमों को बढ़ाने और उन्हें आधुनिक बनाने, इंटीग्रेटेड पशुधन, डेयरी और पोल्ट्री वैल्यू चेन बनाने और पशुधन किसान उत्पादक संगठनों के गठन को बढ़ावा देने पर भी काम करेगी।
उन्होंने कहा कि हाई-वैल्यू एग्रीकल्चर के लिए, खेती की पैदावार में विविधता लाने, प्रोडक्टिविटी बढ़ाने, किसानों की इनकम बढ़ाने और रोज़गार के नए अवसर पैदा करने के लिए नारियल और चंदन जैसी फसलों को सपोर्ट दिया जाएगा।
किसानों की आय बढ़ाने के व्यापक उद्देश्य के तहत, बजट में 500 जलाशयों और अमृत सरोवरों के एकीकृत विकास, तटीय क्षेत्रों में मत्स्य पालन मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने और स्टार्ट-अप और महिला नेतृत्व वाले समूहों के साथ-साथ मछली किसान उत्पादक संगठनों को शामिल करते हुए बाजार संबंधों को सक्षम बनाने के प्रावधान शामिल हैं।
निर्मला सीतारमण ने कहा कि पशुपालन किसानों की आय बढ़ाने के प्रमुख क्षेत्रों में से एक होगा। ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण रोजगार के अवसर प्रदान करने के लिए, सरकार पशुपालन क्षेत्र को उद्यमिता विकास में कई माध्यमों से सहयोग देगी।