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UPI पेमेंट पर चार्ज का मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, 2000 से अधिक के लेनदेन पर नए नियमों को रद्द करने की मांग

UPI Charges: 2000 से ज्यादा के मर्चेंट UPI पेमेंट पर लागू होने वाले नए MDR सिस्टम को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है। वकील अंजन दत्ता ने वित्त मंत्रालय के 14 सितंबर के नोटिफिकेशन और 15 सितंबर को जारी MDR फ्रेमवर्क को रद्द करने की मांग की है।
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Updated: 16 Sep 2026, 5:51 PM IST
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सुप्रीम कोर्ट (फोटो सोर्स: ANI)

UPI Charges Supreme Court Plea: कमर्शियल UPI पेमेंट के लिए नया मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) फ्रेमवर्क लागू करने के केंद्र सरकार के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है। याचिका में MDR फ्रेमवर्क और केंद्रीय वित्त मंत्रालय द्वारा जारी नोटिफिकेशन को पूरी तरह से रद्द करने की मांग की गई है। इसमें तर्क दिया गया है कि 2000 से ज्यादा के कमर्शियल ट्रांजैक्शन पर शुल्क लगाने का सरकार का फैसला मनमाना है और इसका अंतिम आर्थिक बोझ आम नागरिकों और उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।

याचिका में सरकार, RBI और NPCI को बनाया गया प्रतिवादी

सुप्रीम कोर्ट के वकील अंजन दत्ता द्वारा दायर इस याचिका में भारत सरकार, केंद्रीय वित्त मंत्रालय, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) और UPI से जुड़ी अन्य संस्थाओं को प्रतिवादी बनाया गया है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि सरकार ने यह कदम बिना किसी उचित कानूनी आधार के उठाया है, जिससे यह पूरी तरह से असंवैधानिक और अनुचित हो गया है।

याचिका में कोर्ट से आग्रह किया गया है कि वह डिजिटल अर्थव्यवस्था और जनता के हितों को ध्यान में रखते हुए इस नियम और नोटिफिकेशन को तत्काल प्रभाव से रद्द करे। हालांकि इस याचिका की सुनवाई के लिए लिस्टिंग या कोर्ट के किसी आदेश के जारी होने के बारे में अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

15 अक्टूबर से लागू होनी है नई शुल्क व्यवस्था

केंद्र सरकार की घोषणा के अनुसार 15 अक्टूबर 2026 से 2,000 से ज्यादा के चुनिंदा पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) UPI ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत की MDR (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) फीस लगेगी। 75,000 या उससे ज्यादा के पेमेंट के लिए प्रति ट्रांजैक्शन अधिकतम 300 की सीमा तय की गई है। तकनीकी रूप से, MDR वह फीस है जो बैंक या पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर उन मर्चेंट से लेते हैं जो डिजिटल पेमेंट स्वीकार करते हैं।

सरकार और रेगुलेटरी संस्थाओं ने साफ किया है कि आम ग्राहकों पर कोई सीधा UPI यूजर शुल्क नहीं लगाया जाएगा और पर्सन-टू-पर्सन (P2P) पेमेंट के साथ-साथ 2,000 तक के छोटे मर्चेंट पेमेंट पूरी तरह से मुफ्त रहेंगे। हालांकि याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि व्यापारी इस लागत को अपने मुनाफे से उठाने के बजाय सामान और सेवाओं की कीमतें बढ़ाकर इसका बोझ ग्राहकों पर डाल देंगे।

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16 Sep 2026, 5:51 PM IST
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